रायबरेली। जिले में लगे 413 राजकीय नलकूप में से ज्यादातर खराब हैं। इससे किसानों को सिंचाई के संकट से जूझना पड़ रहा है। हालांकि विभागीय जिम्मेदार 400 नलकूप चालू हालत में होने का दावा कर रहे हैं जबकि जमीनी हकीकत इसके उलट है। करीब 30 फीसदी नलकूप बिजली समस्या, तो कई मोटर खराबी की वजह से बंद पड़े हैं। सिंचाई न हो पाने से बारिश थमने के बाद धान की फसल सूखने का खतरा किसानों को परेशान कर रहा है।
जिले में लगे 413 नलकूपों से करीब 20 हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती है। इनके रखरखाव के लिए हर साल प्रति नलकूप 50 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन यह धनराशि केवल कागजों पर ही खर्च होती है। कहीं स्टार्टर खराब, तो कहीं मोटर जली है। डीह क्षेत्र के पूरे झीम गांव का राजकीय नलकूप कई साल से खराब है। इससे किसानों को निजी नलकूपों के भरोसे खेती करनी पड़ रही है। राही क्षेत्र के सुलखियापुर और खनुवा गांव के बीच लगा नलकूप करीब 10 साल से खराब है। इसी तरह सलोन, ऊंचाहार, डीह, छतोह, रोहनिया में भी कई नलकूप खराब हैं।
गदागंज के रामसिंह यादव, जगतपुर के विनोत पाल, रौतापुर के मदनलाल ने बताया कि पिछले दिनों हुई बारिश से धान की फसल को सिंचाई नहीं करनी पड़ी, लेकिन अब धान की फसल में बालियां निकल रहीं हैं। इस समय सिंचाई की जरूरत है। राजकीय नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि सभी नलकूप चल रहे हैं। यदि कहीं समस्या है, तो उसे दूर कराया जाएगा।