वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिले के 11 विभागों के अफसर विकास कार्यों के लिए आए तीन करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाए। 31 मार्च तक बजट को ठिकाने लगाने का खूब प्रयास किया। इसके बावजूद तीन करोड़ की रकम लैप्स होने से नहीं बचा सके।
सिंचाई विभाग, समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग रुपये वापस करने में सबसे आगे रहे। मालूम हो कि जिले के विकास के लिए शासन से अरबों रुपये मिले लेकिन विभागीय अफसरों का लापरवाही के चलते इसका सदुपयोग नहीं किया जा सका।
वित्तीय वर्ष के समापन पर इस बजट को ठिकाने लगाने की कसरत भी खूब की गई। इसके बावजूद वे रकम को लैप्स होने से नहीं बचा सके। कृषि विभाग ने टूर के नाम पर वाहनों को भुगतान का खूब प्रयास किया लेकिन पूरी रकम नहीं खपा सका।
महिला एवं बाल विकास के साथ ही अल्पसंख्यक विभाग भी पूरा रुपया खर्च नहीं कर पाया। इसके अलावा सिंचाई विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग समेत अन्य विभागों ने भी बजट को ठिकाने लगाने का प्रयास किया, लेकिन पूरी धनराशि खर्च नहीं कर पाए। विभागों द्वारा रुपये खर्च न कर पाने के कारण 31 मार्च की रात 12 बजे पूरा धन लैप्स हो गया।
विभिन्न विभागों से अनुसूचित जाति के लोगों के विकास व सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए 90 करोड़ रुपये मिले। लेकिन 75 लाख रुपये अंत तक खर्च नहीं हो सके। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग को अलग से अनुसूचित जाति के लोगों को योजनाओं का लाभ देने के लिए छह करोड़ रुपये दिए गए। इसमें भी चार लाख से अधिक की धनराशि लैप्स हो गई है।
महिला व बाल विकास के लिए जिले को मिले धन को भी विभाग खर्च नहीं कर पाए। 28 करोड़ 33 लाख से अधिक की धनराशि मिली। इसमें 27 करोड़ 86 लाख रुपये खर्च हो सके। 46 लाख 37 हजार से अधिक धनराशि महिला व बाल विकास में खर्च नहीं हो सकी।
वरिष्ठ कोषाधिकारी सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने बताया कि 31 मार्च की रात 12 बजे तक जिन विभागों ने बिल देकर प्रक्रिया को पूरा कराया। उन विभागों को विकास के लिए मिले बजट का भुगतान किया गया। रात 12 बजे के बाद बचा बजट अपने आप ही लैप्स हो गया। विभाग समय से ध्यान देते तो यह धनराशि लैप्स होने से बच जाती।