जिले के नौनिहालों पर कुपोषण का खतरा मंडरा रहा है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई जा रही योजनाओं में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बच्चों को कुपोषण से नहीं बचाया जा पा रहा है।
शासन के निर्देश पर हाल में ही कराए गए वजन दिवस में 28455 बच्चे अतिकुपोषित और 80119 बच्चे कुपोषित पाए गए। इससे विभागीय अफसरों की नींद उड़ी है।
जिले के 18 ब्लॉक में करीब 2833 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां पर 0 से 6 वर्ष तक के 3,42,910 बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोष्टाहार के साथ हॉट कुक्ड भोजन दिया जाता है।
इसका उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बचाना है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर मेडिकल चेकअप भी किया जाता है। हाल ही में कराए गए वजन दिवस में अफसरों की कलई खुल गई।
एक लाख से अधिक बच्चे कुपोषित और अतिकुपोषित मिले। नौनिहालों के जीवन पर मंडरा रहे खतरे पर अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं जांच रिपोर्ट से अभिभावकों को अपने लाडलों के जीवन की चिंता सताने लगी है।