वैज्ञानिक तरीके से करें आलू की खेती
रायबरेली। कृषि विज्ञान दरियापुर में शुक्रवार को किसानों को आलू की वैज्ञानिक खेती के बारे में जानकारी दी गई। किसानों ने आलू की फसल में अच्छा उत्पादन और रोगों से बचाव के बारे में जानकारी ली। वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि आलू सब्जियों का राजा है। इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि आलू की बोवाई से तीन से चार गहरी जोताई करके मिट्टी भुरभुरी बना लेते हैं। बोवाई का समय मृदा का पीएच मान 6-7 डिग्री सेल्सियस के बीच अच्छा माना जाता है। एक हेक्टेअर खेत के लिए 20 से 30 क्विंटल आलू के बीज की मात्रा की आवश्यकता पड़ती है। आलू को बिना काटे लगाना चाहिए। बोवाई के चार सप्ताह पहले 25 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी गोबर की खाद डालकर अच्छी तरह मिला देना चाहिए। उन्होंने बताया कि खेत की उर्वरता के अनुसार 100-125 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 से 100 किलोग्राम फास्फोरस और 80-100 किलोग्राम पोटास प्रति हेक्टेअर की जरूरत पड़ती है। मुख्य फसल की बोवाई अक्तूबर के चौथे और नवंबर के प्रथम सप्ताह में करनी चाहिए। इस मौके पर किसान आशुतोष, साहबदीन, आलोक कुमार, फूलचंद्र, रामनरेश आदि किसान मौजूद रहे।