देखरेख को 71 समितियां, फिर भी नहरें बदहाल
रायबरेली। सिंचाई विभाग खंड 45 में भले ही नहरों की देखरेख और सफाई के लिए समितियां बनाई गई, लेकिन नहरों की हालत वैसी की वैसी ही है। छह साल से यह समितियां नहरों की देखरेख कर रही हैं। इसके लिए हर साल प्रत्येक समिति को 80-90 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके बावजूद नहरों की हालत में कोई सुधार नहीं हो सका है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
विभागीय अधिकारियों से शिकायत करने पर सीधे कह दिया जाता है कि नहरों की देखरेख समितियां कर रही हैं। पानी जाए या न जाए हम लोगों की कोई जिम्मेदारी नहीं है। सिंचाई विभाग खंड 45 में 72 छोटी बड़ी नहरें हैं। इनमें एक डीह बड़ा रजबहा है। जिसकी देखरेख खुद विभाग करता है। इसके लिए सभी 71 नहरों की देखदेख के लिए समितियों का गठन किया गया है। यहीं समितियां पूरा कार्य कराती हैं। नहर की पटरियों से लेकर सफाई तक की जिम्मेदारी इन समितियों की है। इसके बावजूद न तो नहरों की सफाई की जाती है और न ही पटरियों की मरम्मत। यही वजह है कि किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वर्ष 2010 में इन समितियों का गठन किया गया। नहरों की सफाई के अलावा अनुरक्षण कार्य के लिए प्रतिवर्ष 80 से 90 हजार प्रति समिति को दिया जाता है। इनका कार्यकाल छह साल के लिए होता है। नहरों से सिंचाई करने वाले किसानों की सहमति पर समितियों का चयन किया जाता है। सलोन तहसील क्षेत्र के जगतपुर माइनर, पदुमपुर, निनावां, बिजौली आदि नहरों की सफाई कई सालों से नहीं कराई गई है। इससे किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं एक्सईएन हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नहरों की देखरेख के लिए समितियां गठित की गई हैं। इसके लिए सीधे उनके खाते में धन भेजा जाता है।