ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहे 40 हजार उपभोक्ता
अमर उजाला ब्यूरो
रायबरेली। पावर कॉर्पोरेशन के अफसरों की लचर कार्यशैली से शहर के करीब 40 हजार उपभोक्ता ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। एक फॉल्ट आने पर उपभोक्ताओं को आधे से एक घंटे तक अंधेरे में रहना पड़ता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रत्येक ट्रांसफार्मर पर ट्राईपोल मैनुअल ऑपरेटर (टीपीएमओ) लगाया जाना है, लेकिन अभी किसी भी ट्रांसफार्मर में नहीं लगाया गया है। इससे उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शहरी क्षेत्र में आरएपीडीआरपी योजना के तहत 250 व 100 एमवीए के 110 ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं। इनमें से करीब 90 ट्रांसफार्मर लगाए जा चुके हैं, मगर किसी भी ट्रांसफार्मर में टीपीएमओ नहीं लगाया गया है। इससे किसी भी एलटी लाइन में फॉल्ट आने पर पूरा फीडर को बंद कर दिया जाता है। एक ट्रांसफार्मर से लगभग 50 उपभोक्ताओं को जबकि फीडर में लगभग 1200 उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति होती है। फॉल्ट ठीक करने के लिए पूरा फीडर बंद कराया जाता है। इससे उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। टीपीएमओ ट्रांसफार्मर के साथ ही लगाया जाता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते अब तक नहीं लगाया गया है।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि, टीपीएमओ जल्द लगवाए जाएंगे। कभी मंगाने तो कभी स्टोर में उपलब्ध होेने की बात कहते हैं, लेकिन अब तक टीपीएमओ नहीं लगवाया गया है। उन्हाेंने बताया कि स्टोर में टीपीएमओ आ गए हैं। जल्द ही इन्हें लगवाया जाएगा।
इनसेट
ये है टीपीएमओ
टीपीएमओ वह ऑपरेटर सिस्टम है, जो प्रत्येक ट्रांसफार्मर में लगाया जाता है। एलटी लाइन में फॉल्ट आने पर इसके जरिए हाईटेंशन लाइन से ट्रांसफार्मर की आपूर्ति बंद की जा सकती है और एलटी लाइन के फॉल्ट को ठीक किया जा सकता है। इससे उस ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ता ही प्रभावित होंगे, लेकिन इसके नहीं लगे होने से पूरा फीडर बंद कराया जाता है। इससे पूरे फीडर के उपभोक्ता भीषण गर्मी में परेशान हो रहे हैं।