खुले आसमान या फिर किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को जल्द खुद की छत मिलेगी। इसके लिए जिले में 15 करोड़ 92 लाख की लागत से 199 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों को बनाने की हरी झंडी दे दी गई है।
इससे केंद्रों में पंजीकृत तीन लाख नौनिहालों को दिक्कतें कम होंगी। हर ब्लॉक में 10 से ज्यादा भवन बनाए जाएंगे। एक भवन में आठ लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। केंद्रों के भवन बनाने की अरसे से मांग की जा रही थी, जिस पर अब प्रस्ताव ओके किया गया। ग्राम पंचायतें, क्षेत्र पंचायतों के माध्यम से भवन बनाए जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 के लिए 199 नए आंगनबाड़ी केंद्र का लक्ष्य दिया है। भवन निर्माण मेें मनरेगा से कन्वर्जन से पांच लाख तक खर्च किए जाएंगे। जबकि पंचायती राज विभाग 1.60 लाख और बाल विकास विभाग दो लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
आंगनबाड़ी केंद्र के भवन में एक कमरा, एक किचेन, एक प्रसाधन, एक स्टोर और एक बरामदा बनाया जाएगा। लगातार काम चलने पर भी एक भवन के निर्माण में कम से कम छह माह का समय लगेगा। किसी ब्लॉक में 10 तो किसी ब्लॉक में 15 भवन बनाए जाएंगे।
एक भवन बनाने में आठ लाख रुपये 60 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। मौजूूदा समय की बात करें तो अधिकतर केंद्र किराए के भवन, प्राथमिक स्कूल और खुले आसमान के नीचे संचालित हो रहे हैं। ग्राम पंचायतों के माध्यम से 60, क्षेत्र पंचायत के माध्यम से 60 और आरईडी के माध्यम से 79 भवनों का निर्माण कराया जाएगा।
अफसरों का दावा है कि जल्द भवन निर्माण कार्य शुरू कराए जाएंगे। मौजूदा समय की बात करें तो जिले में 2833 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इसमें तीन लाख 37 हजार नौनिहाल पढ़ाई कर रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों का खुद का आशियाना न होने के कारण बच्चों को पढ़ने में दिक्कत होती है। खासकर बारिश के दौरान अधिक दिक्कत होती है। अब नए भवन बनने से यह समस्या दूर हो सकेगी।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनाेज कुमार के मुताबिक लक्ष्य के सापेक्ष सभी निर्माण स्थलों का चयन हो गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर जल्दी ही नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण का काम शुरू होगा। जिले में 199 आंगनबाड़ी केंद्र के भवनों का निर्माण कराया जाएगा।