रायबरेली। चिकित्सा के क्षेत्र में जिले में नए युग की शुरूआत तो सोमवार को हो गई, मगर दिल्ली जैसे एम्स के इलाज को कम से कम दो साल इंतजार करना होगा। जून 2020 में हॉस्पिटल भवन (मेडिकल कॉलेज) के पूरा होने के बाद ही जटिल रोगों का इलाज यहां होेगा। फिलहाल इमरजेंसी सेवाएं शुरू करने की भी तैयारी नहीं है। ओपीडी में आने वाले गंभीर रोगियों को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे रोगियों को एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर किया जाएगा।
शहर से सटे दरियापुर स्थित एम्स में 1400 क्षमता के छात्रावास व स्टाफ के लिए आवासों के निर्माण का काम पूरा होने के बाद सोमवार से ओपीडी शुरू हो गई है। करीब 278 करोड़ रुपये लागत से 600 बेड के एम्स (चिकित्सीय परिसर) बनाने का काम शुरू हो गया है। ये काम सर्विस कंसलटेंसी कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड करा रहा है। निर्माण इकाई को जून 2020 तक काम पूरा करना है, जिसके बाद एम्स में पूरी तरह काम शुरू होगा। जब तक पूरा हॉस्पिटल बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक जटिल रोगियों को यहां दिल्ली के एम्स जैसा इलाज नहीं मिल सकेगा। इसके लिए अभी इंतजार करना होगा।
रेडियोलॉजिस्ट, गाइनो व पीडियाट्रिक ओपीडी भी जल्द
एम्स में जल्द ही स्त्री रोग विशेषज्ञ (गाइनोलॉजिस्ट), बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक) और रेडियोलॉजिस्ट की ओपीडी भी शुरू हो जाएंगी। ये चिकित्सक इसी सप्ताह जॉइन कर सकते हैं, जिससे बच्चों व महिलाओं को इलाज के लिए भटकना नहीं पडे़ेगा।
किसानों की 50 एकड़ जमीन का पेंच
एम्स के लिए किसानों से करीब 50 एकड़ जमीन लेनी है। किसानों को जमीन के एवज में मुआवजे के लिए कई करोड़ रुपये पहले जिले को मिले थे, लेकिन प्रक्रिया धीमी होने के कारण प्रशासन ने बजट वापस कर दिया था। अब ओपीडी शुरू होने के बाद मुआवजे की धनराशि मंगवाने का काम तेज हो गया है। प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने निरीक्षण के दौरान डीएम को प्रपोजल शासन को भेजने के आदेश दिए थे। हालांकि प्रपोजल अभी तैयार ही किया जा रहा है।
जून 2020 में हॉस्पिटल भवन का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ही विशेषज्ञ सेवाएं मिल सकेंगी। ओपीडी शुरू करा दी गई है। एक-एक करके अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, मगर दिल्ली एम्स जैसा इलाज वर्ष 2020 के बाद ही हो सकेगा। इसके लिए लोगों को इंतजार करना होगा।
डॉ. अशोक कुमार, अधीक्षक एम्स रायबरेली