भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना
रायबरेली। जिले में ग्रामीण अंचलों में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के केंद्र सरकार की दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (डीडीयूजीवीवाई) भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। योजना के तहत सात नए बिजली घर और उपकेंद्रों में सुधार कार्य होना था, लेकिन अब तक न तो कोई उपकेंद्र बना है न ही किसी उपकेंद्र में सुधार किया गया है। इससे आम जनता को बिजली को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सोमवार को उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट के पदाधिकारियों ने डीएम को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। व्यापारियों ने निर्माण एजेंसी और अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। मंडल के जिलाध्यक्ष आशीष द्विवेदी ने बताया की दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना से सात बिजली घरों का निर्माण व सभी विद्युत उपकेंद्रों के सुदृढ़ीकरण का काम होना है, लेकिन विभागीय भ्रष्टाचार और कार्यदायी संस्था की मिलीभगत के कारण समयावधि पूर्ण होने के बाद भी योजना का लाभ आम जन मानस को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा की सरकार ने ग्रामीण अंचलों में 18 घंटे, तहसील मुख्यालय को 20 घंटे विद्युत आपूर्ति प्रदान करने की मंशा से योजना को क्रियान्वित किया था, लेकिन यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।
व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष मुशर्रफ खान, अमनदीप बग्गा ने कहा की ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई चल रही है, जिससे वितरण प्रणाली पर भार बढ़ गया है। यदि निर्धारित समयावधि के अंदर सातों उपकेंद्रों का निर्माण हो गया होता तो किसानों को असुविधा न होती। व्यापारियों योजना से जुड़े लोगों की जांच कराने की मांग की है। इस मौके पर नगर अध्यक्ष सतीश वर्मा, अजीत प्रताप सिंह, राजेंद्र बाजपेयी, आरसी त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।