...कहां मुमकिन है, आदमी का भी आदमी होना
लालगंज (रायबरेली)। कस्बे के बैसवारा इंटर कॉलेज में शनिवार को सुप्रसिद्ध कवि डॉ. शिवबहादुर सिंह भदौरिया की जयंती पर काव्यालोक की ओर से काव्यांजलि का आयोजन किया गया।
कवि मधुकर अस्थाना की रचना सभी को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपनी रचना - जिंदगी का भी जिंदगी होना, रोशनी का भी रोशनी होना। इस जमाने में कहां मुमकिन है, आदमी का आदमी होना, पढ़ी। लोगों ने बलदेव सिंह सागर द्वारा पढ़ी गई रचना को भी खूब सराहा। उन्होंने पढ़ा- स्नेह सुधियों के दीपक जलाती रही, काव्य की साधना में जगाती रही। दूर तारे गगन में दिखे टूटते, नील साड़ी सदा याद आती रही।।
नवगीतकार डॉ. सुरेश ने अपनी रचना पढ़ी- सैकड़ों सुईयां चुभाता है समय, समय से कटकर कहां जायें, बिखर कर बंटकर कहां जायें। डॉ. महादेव सिंह ने भी अपनी रचना पढ़ी- धरा के नजारे तुम्हारे लिए हैं, गगन चांद तारे तुम्हारे लिए हैं। प्रकृति को कभी दांव पर मत लगाना, समय के इशारे तुम्हारे लिए हैं। इनके अलावा डॉ. माहेश्वर तिवारी, रामअधीर, वीरेंद्र आस्तिक, रमाकांत यादव, शमशुद्दीन अजहर ने भी काव्य पाठ किया। विनय सिंह भदौरिया ने आए हुए सभी कवियों व अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह, सुरेशनारायण सिंह, वीरेंद्र शुक्ला, सुरेश दीक्षित, भवानी प्रसाद श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
कवियों को किया गया सम्मान
गोष्ठी में आए कवियों का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। नवगीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी को डॉ. शिवबहादुर सिंह भदौरिया स्मृति, रामअधीर को पं. ब्रजनंदन पांडेय स्मृति, मधुकर अष्ठाना को डॉ. उपेंद्र बहादुर सिंह स्मृति, डॉ. सुरेश को मधुकर खरे स्मृति, वीरेंद्र आस्तिक को रामप्यारे श्रीवास्तव नीलम स्मृति, डॉ. महादेव सिंह को प्रो. हरेंद्र बहादुर सिंह स्मृति, रमाकांत यादव को दिनेश सिंह स्मृति, शमशुद्दीन अजहर को डॉ. रामप्रकाश सिंह स्मृति व बलदेव सिंह सागर को महमूद अतहर स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।