300 निजी क्लीनिकों में ताले, भटकते रहे मरीज
रायबरेली। कोलकाता में डॉक्टरों के साथ हुए अमानवीय व्यवहार से नाराज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पदाधिकारी व सदस्य सोमवार को सड़कों पर उतर आए। सुबह छह बजे से जिले की सभी 300 निजी ओपीडी में ताले लटक गए।
इससे 80 हजार से अधिक रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हड़ताल से जिला और महिला अस्पताल में रोगियों और तीमारदारों की भीड़ रही। आईएमए के डॉक्टरों ने आईएमए भवन में एकत्र होकर धरना प्रदर्शन करने के बाद डीएम को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
आईएमए भवन में प्रदर्शन के दौरान अध्यक्ष डॉ. हेमंत कुमार सिंह ने कहा कि जो चिकित्सक मरीज को बचाने के लिए अपनी जान लगा देते है, उन्हीं चिकित्सकों से हाथापाई करना उनको गाली देना आदि से पूरे भारत के डॉक्टरों को पीड़ा पहुंची है।
चिकित्सकों ने कहा कि इस प्रकार के हिंसात्मक कार्यों का हमेशा विरोध किया जाएगा। सरकार से इस पर कड़े कानून लाने का अनुरोध किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कहा कि हमारी सुरक्षा की जिम्मदारी सरकार की है।
सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाए जाए। इस अवसर पर डॉ. एआर त्रिपाठी, डॉ. केएस सिंह, डॉ. मनीष त्रिवेदी, डॉ. अल्का त्रिपाठी, डॉ. सत्य प्रकाश, डॉ. अनिल आहूजा आदि आईएमए के चिकित्सक मौजूद रहे।
डॉक्टरों की हड़ताल से निजी क्लीनिकों पर इलाज के लिए आने वाले रोगियों को दिनभर परेशान होना पड़ा। सूचना मिलने के कारण तमाम रोगी तो घरों से ही नहीं निकले। कुछ लोगों ने सरकारी अस्पतालों में पहुंचकर इलाज कराया।
निजी क्लीनिकों में हड़ताल के चलते जिला अस्पताल में सोमवार को ओपीडी दो हजार को पार कर गई। तमाम रोगी तो अस्पताल में भीड़ देकर वापस भी लौट गए। जो पहुंचे उन्हें भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में भी रोगियों की संख्या अधिक रही। सरकारी अस्पतालों में भीड़ अधिक होने के कारण रोगियों को परेशान भी होना पड़ा। कई घंटे इंतजार करने के बाद इलाज कराना पड़ा।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीरबल का कहना है कि जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 16 सौ मरीज आते हैं, लेकिन सोमवार को अस्पताल में 22 सौ मरीज आए। सभी चिकित्सकों की ओपीडी में रोगियों की भीड़ रही।