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ट्रेनों की लेटलतीफी से जूझ रहे 50 हजार मुसाफिर, पंजाब मेल निरस्त

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पंजाब मेल निरस्त, ट्रेनों की लेटलतीफी से जूझ रहे 50 हजार लोग
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रायबरेली। ट्रेनों की लेटलतीफी कम नहीं हो रही है। कहने को सर्द मौसम में कोहरे की वजह से गाड़ियां विलंब से चलती थीं, लेकिन अब तो गर्मी के मौसम में भी ट्रेनों का संचालन पटरी से उतरा हुआ है। लंबी दूरी की ट्रेनों की लेटलतीफी और आसपास के जिलों को जोड़ने के लिए चलाई जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस की हालत भी बहुत अच्छी नहीं होने का खामियाजा प्रतिदिन करीब 50 हजार यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

पंजाब मेल शुक्रवार को भी अचानक निरस्त होने से यात्रियों को उमस भरी गर्मी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ट्रेनों की लेटलतीफी के मामले में हावड़ा से अमृतसर के बीच दौड़ने वाली पंजाब मेल के दोनों फेरों की हालत ज्यादा खराब है। जून के शुरुआती महीने में यह गाड़ी 15 से 18 घंटे विलंब से चल रही थी।
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हावड़ा से अमृतसर जाने वाली गाड़ी संख्या 13005 पंजाब मेल को लेटलतीफी के कारण तीन दिन पहले निरस्त किया गया था। जिससे यह गाड़ी 12 जून को नहीं आई थी। इसी तरह अमृतसर से हावड़ा जाने वाली गाड़ी संख्या 13006 पंजाब मेल निरस्त होने के कारण शुक्रवार को नहीं आई।

ये दोनों गाड़ियां दोपहर में रायबरेली से होकर गुजरती है, लेकिन दोनों ही फेरों की गाड़ियां कभी भी समय से नहीं आती हैं और यात्रियों को रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर तपती दोपहरी में इंतजार करना पड़ता है। दोपहर में ही गुजरने वाली गाड़ी संख्या 14265 जनता एक्सप्रेस भी विलंब से चल रही है।

इंटरसिटी एक्सप्रेस में गाड़ी संख्या 14123-24 प्रतापगढ़-कानपुर-प्रतापगढ़, गाड़ी संख्या 14203-04 वाराणसी-लखनऊ-वाराणसी, गाड़ी संख्या 14209-10 प्रयाग-लखनऊ-प्रयाग, गाड़ी संख्या 14219-20 लखनऊ-वाराणसी-लखनऊ के संचालन में भी सुधार नहीं हो रहा है। कानपुर से प्रतापगढ़ लौटने वाली गाड़ी संख्या 14124 इंटरसिटी एक्सप्रेस, दिल्ली से प्रतापगढ़ लौटने वाली गाड़ी संख्या 14208 पद्मावत एक्सप्रेस रोजाना एक से दो घंटे की देरी से यहां पहुंच रही है।

नई दिल्ली से वाराणसी जाने वाली गाड़ी संख्या 14258 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस गुरुवार रात पौने तीन घंटे की देरी से पहुंची। प्रयाग से लखनऊ जाने वाली गाड़ी संख्या 14215 गंगा गोमती एक्सप्रेस भले ही थोड़ा बहुत दुरुस्त रहती है, लेकिन वापसी में यही गाड़ी संख्या 14216 गंगा गोमती एक्सप्रेस औसतन एक घंटे लेट रहती है।

रायबरेली रेलवे स्टेशन से रोजाना औसतन 50 हजार यात्री सफर करते हैं। इसके बावजूद यहां पेयजल व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। पंजाब मेल, काशी विश्वनाथ, पद्मावत, जनता एक्सप्रेस आदि ट्रेनों में आगे और पीछे लगे रहने वाले जनरल बोगियों में यात्री ठूंस कर भरे रहते हैं, जिन्हें पानी के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ती है।

प्लेटफार्म नंबर एक, दो-तीन पर जो भी वाटर बूथ बने हैं, वे दूर-दूर हैं। किसी तरह यात्री टोटियों तक पहुंच जाते हैं तो उन्हें ठंडा पानी नसीब नहीं होता है। टोटियां गर्म पानी उगलती हैं। कभी-कभी तो भीड़ ज्यादा होने पर यात्री को पानी नहीं मिल पाता है और ट्रेन चलने लगती है तो वे भागकर चढ़ते हैं।
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स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि लंबी दूरी की गाड़ियां अक्सर पिछले स्टेशनों से ही लेट हो जाया करती हैं। कई जगह मरम्मत और सुधार कार्य की वजह से भी संचालन प्रभावित होता है। रेलवे स्टेशन पर पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं, जिससे कुछ सुधार हुआ है।
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