गंगा नदी और कैनाल पंप डलमऊ में मरी मछलियों की जांच शुरू हो गई है। रविवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। टीम का दावा है कि दूषित पानी की वजह से मछलियां नहीं मरी हैं। अब इसकी जांच मत्स्य विभाग को करनी है कि मछलियां कैसे मरीं।
वहीं मछलियों के मरने से क्षेत्रीय लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि मछलियों के मरने के बाद आ रही दुर्गंध से संक्रामक रोग फैलने का खतरा मंडरा रहा है। साफ-सफाई के नाम पर खानापूरी की जा रही है।
गौरतलब है कि गंगा नदी और कैनाल पंप डलमऊ में शनिवार को लाखों मछलियां मर गई थीं। इससे हड़कंप मच गया था। क्षेत्रीय लोगों का दावा था कि पानी प्रदूषित होने की वजह से मछलियां मरी हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी यूएन उपाध्याय ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर मछलियों के मरने की जांच की। क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि पानी की जांच की गई है। पानी शुद्ध है। मछलियों के मरने की वजह कुछ और है। उनका कहना है कि अब मत्स्य विभाग इस बात की जांच करे कि मछलियां क्यों मर रही हैं।
डलमऊ। कस्बे के शुभम गौड़, अमरेश पांडेय, राकेश कुमार, अनिल कुमार, मो. हारुन, अंबिका सोनकर, आनंद श्रीवास्तव का कहना है कि मछलियों की दुर्गंध से आसपास का क्षेत्र दूषित हो रहा है और लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
क्षेत्रीय प्रशासन सूचना के बावजूद खानापूर्ति के नाम पर मात्र जांच करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस समस्या से राहत के लिए अब तक किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
लोगों ने बताया कि यदि शीघ्र ही नहर चलवा कर या नहर से इन मछलियों को बाहर निकलवाकर मिट्टी में दबाया ना गया तो आसपास के क्षेत्र में संक्रामक बीमारी फैल जाएगी। नगर पंचायत अध्यक्ष बृजेशदत्त गौड़ ने बताया कि जल्द इसको लेकर कुछ कदम उठाए जाएंगे।