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989 गांवों में होगी करोड़ों के कार्यों की पड़ताल

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989 गांवों में होगी करोड़ों के कार्यों की पड़ताल
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रायबरेली। दो गांवों में विकास कार्यों में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद जिले की सभी 989 ग्राम पंचायतों में करोड़ों के विकास कार्यों की पड़ताल होगी। राज्यवित्त, 13वें व 14वें वित्त से मिले धन को खर्च करने में मानकों की अनदेखी की पड़ताल की जाएगी। ग्राम पंचायतों में आदेश के बाद भी बिना वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति और वर्क आईडी जनरेट कराए ही भुगतान किया गया है।
उपनिदेशक (पंचायतीराज) एसएन सिंह ने बृहस्पतिवार को जिले की दो ग्राम पंचायतों अरखा और लोधवारी में विकास कार्यों में घपला पकड़ा था। शासन द्वारा चिह्नित किए गए इन गांवों में जांच करने के लिए वे आए थे। ग्राम पंचायतों में आदेशों को ताक पर रखकर बिना वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति और बिना वर्क आईडी जारी किए काम कराए जाने का मामला पकड़ा था। जिला पंचायत के इंजीनियर वासू कृष्ण को कार्यों की तकनीकी जांच के आदेश भी दिए थे। दो गांवों में मनमानी पकड़ में आने के बाद अब विभाग जिले के सभी 989 ग्राम पंचायतों में पड़ताल कराने का जा रहा है। आशंका है कि जिले की ग्राम पंचायतों में बिना बैठक किए और कायों की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के ही काम कराए गए हैं। सभी एडीओ पंचायतों को पिछले एक साल में कराए गए कार्यों से संबंधित पत्रावलियों की पड़ताल करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। कार्यों से संबंधित जारी की गई वर्क आईडी की भी रिपोर्ट मांगी गई है। कितने ऐसे काम कराए गए हैं, जिनमें वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति तक नहीं ली गई।
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कार्यों में गड़बड़ियों के कारण ही 14वें वित्त से ग्राम पंचायतों को बजट कई महीनों से नहीं दिया गया है। बजट न मिल पाने के कारण गांवों में काम नहीं हो पा रहे हैं। राज्य वित्त से मिले कुछ धन से काम चलाया जा रहा है। हालांकि वर्तमान समय में ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त से ही विकास के अधिक सबसे अधिक धनराशि दी जाती है।

अधूरे पडे़ प्रसाधन कक्ष, नहीं मिल रहा बजट
जिले में 48 हजार से अधिक प्रसाधनों कक्षों के निर्माण के लिए अब तक प्रथम किस्त दी गई, लेकिन तमाम गांवों के लाभार्थियों को दूसरी किस्त न मिल पाने के कारण काम पूरा नहीं हो रहा है। अधूरे प्रसाधन कक्ष किसी के काम नहीं आ रहे हैं। विभाग का दावा है कि जिले में अब तक 26 हजार प्रसाधन कक्षों के निर्माण का काम पूरा हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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प्रसाधन कक्षों के निर्माण के लिए लाभार्थियों के खातों में धनराशि भेजी गई है। राज्यवित्त, 13वें व 14वें वित्त आयोग से कराए गए कार्यों में शासन से जारी आदेशों-निर्देशों की पड़ताल कराई जाएगी। दो गांवों में अनदेखी पकड़ में आने के बाद यह निर्णय लिया गया है।- सीके वर्मा, डीपीआरओ
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