सभी रजबहों और माइनरों को चलाने के लिए चार हजार क्यूसेक पानी की जरूरत है, जबकि आपूर्ति सिर्फ 2500 क्यूसेक की ही हो रही है।
घाघरा में पानी की कमी के कारण शारदा सहायक नहर को 7 जनवरी को बंद कर दिया गया था। इससे 10 ब्लॉकों में सिंचाई की समस्या खड़ी हो गई थी।
करीब तीन सप्ताह तक किसानों को पानी नहीं मिल सका। इस दौरान किसानों ने अफसरों से गुहार लगाई। बीते दिन पानी छोड़ा तो लेकिन इसमें भी कंजूसी बरती जा रही है।
नहर से जुडे़ करीब 175 रजबहों और माइनरों में पानी पहुंच सके, इसके लिए नहर में चार हजार क्यूसेक पानी की जरूरत है। जबकि दिया सिर्फ 2500 क्यूसेक पानी ही जा रहा है।
इसकी वजह से ऊंचाई पर बनी रायबरेली रजबहा, हरदासपुर माइनर, शोरा रजबहा, बछरावां रजबहा समेत 40 से अधिक माइनरों में पानी नहीं चढ़ पा रहा है।
महराजगंज के 32, हरचंदपुर के 50, बछरावां के 40 और राही ग्राम सभा के 30 गांवों में खेतों की सिंचाई के लिए किसानों में मारामारी मची है।
बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के किसान रमाशंकर, प्रदीप चौधरी, राही ब्लॉक क्षेत्र के अखिल कुमार व महराजगंज ब्लॉक क्षेत्र के रामलखन समेत अन्य किसानों का कहना है कि एक समय था जब सिर्फ नहरों के सहारे ही खेती होती थी।
लेकिन अफसरों की लापरवाही से अब यह संभव नहीं रह गया है। महीनों नहरें सूखी पड़ी रहती है। सिंचाई की यही समस्या इस समय भी है। नहरों में धूल उड़ रही है।
नलकूपों से सिंचाई के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। फसल की लागत भी अधिक आती है। अन्नदाताओं ने कहा कि यदि नहरें न चलीं तो फसल कमजोर हो जाएगी और उत्पादन नहीं होगा। किसान बर्बाद हो जाएंगे।
शारदा सहायक खंड दक्षिणी के एक्सईएन/नोडल अफसर सिद्धार्थ कुमार का कहना है कि शारदा सहायक नहर में चार हजार क्यूसेक पानी की जरूरत है।
तभी सभी नहरें चल सकेंगी। लेकिन सिर्फ ढाई हजार क्यूसेक पानी ही मिल रहा है। लखनऊ मुख्यालय को कई बार पत्र लिखा गया। लेकिन पानी की कमी दूर नहीं हुई। फिर से पत्राचार कर मांग के अनुरूप पानी देने की मांग की जाएगी।