रायबरेली। रामनगरी अयोध्या से उठी राम मंदिर बनाने की आवाज भले ही देश में गूंज रही हो, लेकिन गांधी परिवार के गढ़ पहुंचे पीएम मोदी इस पर खामोशी बनाए रहे। हर मुद्दे पर उन्होंने अपनी बात को बेबाकी के साथ रखा और इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया पर अपने 50 मिनट के भाषण में उन्होंने राम मंदिर का जिक्र तक नहीं किया।
इससे वहां पर बैठे लोगों को इस बात को लेकर नाराजगी थी और उनका साफ कहना था कि राम मंदिर की सियासत को हवा देकर भाजपा केंद्र सत्ता में तो आ जाती है, लेकिन इस पर अपना रुख साफ नहीं कर रही है। तीन राज्यों में करारी शिकस्त के बाद भी पार्टी इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं बोल रही है। बस परदे के पीछे से ही राम मंदिर को भुनाकर वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश में है।
अयोध्या में राम मंदिर बनाने का मुद्दा गरम चल रहा है। कभी अयोध्या में संत समाज आक्रोशित होकर मंदिर बनाने की आवाज बुलंद कर रहा है तो कभी दिल्ली में इसको लेकर प्रदर्शन किया जाता है। यह हाल तब है, जब वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के घोषणापत्र में राम मंदिर बनाने की बात भी थी।
होते करते साढ़े चार साल का समय बीत गया, लेकिन मौजूदा एनडीए सरकार इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाई है। मामला कोर्ट में पहुंचने पर संत समाज राम मंदिर बनाने के लिए संसद में कानून बनाने की मांग कर रहा है। अब लोकसभा चुनाव एक बार फिर आने वाला है। ऐसे में राम मंदिर बनाने को लेकर आवाज उठ रही है।
गांधी परिवार के गढ़ पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को माडर्न रेल कोच फैक्टरी लालगंज से लोकसभा 2019 का अपरोक्ष रूप से शंखनाद भी क र दिया। अपने भाषण में पीएम मोदी ने किसानों की बेहतरी करने, युवाओं को रोजगार दिलाने, विकास कार्य कराने समेत अन्य मुद्दे पर न सिर्फ खुलकर बोले, बल्कि कांग्रेस पर हमलावर नजर आए।
रायबरेली की धरती पर पहुंचे पीएम मोदी से लोगों को उम्मीद थी कि राम मंदिर पर जरूर कुछ बोलेंगे, लेकिन उन्होंने अपने भाषण के दौरान इस मुद्दे पर पूरी तरह से खामोशी बनाए रखा। देश हित के मुद्दे का भी पीएम ने जिक्र किया। पर जिस मुद्दे को लेकर वह सियासत में आए, उस मुद्दे पर ही नहीं बोले। इसे लेकर लोगों में नाराजगी भी रही।