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राम ने तोड़ा धनुष, सीता के साथ हुआ विवाह

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सलोन (रायबरेली)। शिव धनुष टूटने पर भगवान परशुराम ने सीता स्वयंवर में आकर क्रोध प्रकट करते हुए धनुष तोड़ने वाले को पूछा तो श्रीराम ने जवाब दिया कि नाथ शंभु धनु भंजन हारा, होइए कोऊ एक दास तुम्हारा। यह जवाब सुनकर परशुराम का क्रोध और अधिक भड़क गया। इस आग में घी डालने का कार्य लक्ष्मण ने किया। इससे घंटों तक परशुराम और लक्ष्मण के मध्य संवाद हुआ। मामला ज्यादा बढ़ने पर श्रीराम ने असलियत प्रकट करके दोनों को शांत किया, जिसके बाद जय श्रीराम से वातावरण गुंजायमान हुआ।
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रामलीला में रविवार की रात कई रोचक प्रसंगों का वर्णन किया गया। श्री रामलीला मंडली द्वारा महर्षि परशुराम लक्ष्मण संवाद का शानदार मंचन किया गया। श्रीराम ने सीता का वरण किया। दर्शकों में उस समय जोश भर गया जब मंच पर लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दोनों के बीच का संवाद इतना रोचक रहा कि दर्शक रोमांचित हो उठे।

जैसे ही श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा पूरा जनकपुर उल्लास से भर गया, तभी राजा जनक के दरबार में महर्षि परशुराम का आगमन होता है। आते ही वह पूछते हैं कि शिव का धनुष किसने तोड़ा। परशुराम के बार-बार पूछने पर जब कोई जवाब नहीं मिला तो वह क्रोधित हो गए।
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उन्होंने कहा कि मूर्ख जनक जल्दी बतला यह धनुष किसने तोड़ा। इस भरे स्वयंवर में किसने सीता से नाता जोड़ा है। जल्दी उसकी सूरत दिखला वरना चौपट कर डालूंगा। जितना पृथ्वी पर राज तेरा सब उलट-पुलट कर डालूंगा। पूरा माहौल भय के वातारण में डूब गया। स्थिति को संभालने के लिए श्रीराम परशुराम के समक्ष आते हैं।

कहते हैं कि शिव धनुष तोड़ने वाला भी कोई शिव का भक्त होगा, जिसने यह अपराध किया। वह दास तुम्हारा होगा। परशुराम को क्त्रसेध में डूबा देखकर श्रीराम के अनुज लक्ष्मण बीच में आ जाते हैं। दोनों के बीच तीखी नोकझोंक होती है। दर्शकों को खूब मजा आता है। किसी प्रकार से उनका गुस्सा शांत होता है, जिसके बाद सिया राम और माता सीता को फूलों का हार पहना के विवाह का भव्य मंचन होता है।
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