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दुराचारी को सात वर्ष का सश्रम कारावास

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दुराचारी को सात वर्ष का सश्रम कारावास
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रायबरेली। नाबालिग किशोरी का अपहरण कर दुराचार करने वाले अभियुक्त को कोर्ट ने सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया है। यह फैसला एफटीसी प्रथम के अपर सत्र न्यायाधीश अचल नारायन सकलानी ने सोमवार को सुनाया।
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अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी (क्रिमिनल) अशोक मिश्रा के अनुसार पीड़िता के पिता ने शिवगढ़ थाने में छह दिसंबर 2002 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी बेटी को शिवगढ़ के बदावर गांव का रहने वाला संतोष गांव के ही कुछ महिलाओं के सहयोग से बहला फुसलाकर भगा ले गया। पुलिस ने विवेचना के बाद संतोष, शीतला प्रसाद, फूला व कांती के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर संतोष को धारा 363, 366, 368, 376 आईपीसी के आरोप में दोष सिद्ध करते हुए सजा सुनाई। वहीं पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में शीतला प्रसाद, फूला व कांती को बरी कर दिया।
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