रायबरेली। दिवाली पर पटाखों की वजह से प्रभावित होने वाले लोगों के इलाज के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी में विशेष प्रबंध किए गए हैं। दो दिन तक ओपीडी नहीं होगी। इस कारण इमरजेंसी में भी मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। बर्न वार्ड में 12 बेड सुरक्षित किए गए हैं।
मरीज आते ही बुलाने पर सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञ, फिजीशियन व अन्य चिकित्सकों को तुरंत पहुंचने के आदेश दिए गए हैं। सभी सीएचसी में भी अलर्ट किया गया है। सीएमओ डॉ. नवीनचंद्रा ने बताया कि मरीजों को इमरजेंसी में भी सभी सुविधाएं मिलेंगी। खासकर दीपावली पर पटाखों व अन्य कारणों से झुलसे व घायल लोगों के इलाज के लिए विशेष बंदोबस्त कराए गए हैं। डॉक्टरों की टीम गठित कर दी गई है, जिससे मरीजों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। सीएचसी में 24 घंटे कम से कम एक चिकित्सक के रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पटाखों से आंखों को ज्यादा खतरा, बरतें सावधानी
दिवाली पर पटाखों से आंखों को बचाने का प्रयास करें। खासकर ग्रीन पटाखों का प्रयाेग करें। आर्यावर्त आई हॉस्पिटल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि पटाखे जलाते समय धूल चिंगारी व धुएं से आंखों को बचाने के लिए सुरक्षात्मक चश्मा पहनें। पटाखों से निकलने वाले धुएं या चिंगारी के कारण अगर आंखों में जलन हो तो रगड़ने से बचें। बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। आंखों को साफ व ठंडे पानी से धो लें। लालिमा ठीक नहीं हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
पटाखे के धुएं से बचें
पटखों से फेफड़ाें को भी नुकसान हो सकता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. गौरव त्रिवेदी का कहना है कि पटाखा जलाते समय विशेष सावधानी और सतर्कता जरूरी है। विशेषकर छोटे बच्चों को पटाखे से दूर रखें। पटाखों से निकलने वाले धुएं से बच्चों के साथ ही स्वयं के भी बचने की जरूरत है, क्योंकि यह धुंआ फेफड़ों को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। कम आवाज और कम धुएं वाले पटाखों का ही प्रयोग किया जाए।