सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधी आबादी ने दिए अपने तर्क
रायबरेली। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं ने अपने-अपने तर्क दिए हैं। महिलाओं का कहना है कि इसकी रोकथाम करना जरूरी है। इस पर रोक लगना चाहिए।
दंडित किया जाना चाहिए : रहनुमा खुर्शीद
अमर नगर की रहने वाली रहनुमा खुर्शीद ने कहा कि तलाक का गलत इस्तेमाल करने वालों को दंडित किया जाना चाहिए। इस्लाम औरत की हर मामले में हिफाजत करता है। समाज को सुधार के लिये आगे आना चाहिए।
इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता : शाहीन बानो
गल्लामंडी की रहने वाली शाहीन बानो कहती हैं कि तलाक का पुरुष प्रधान समाज गलत इस्तेमाल करता है, जबकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता।
सोच समझकर तलाक देने का हुक्म दिया : सुरैया खानम
सैय्यद नगर की रहने वाली सुरैया खानम कहती हैं कि इस्लाम में बहुत सोच समझकर तलाक देने का हुक्म दिया गया है। शरीयत की अधूरी जानकारियों से विवाद बढ़े और सियासत ने उसको मुद्दा बना लिया, जिसके नतीजे ठीक नही है।
रोकथाम करनी चाहिए : शबनम नियाज
कानपुर रोड की रहने वाली शबनम नियाज कहती हैं कि एक युवती के निकाह के चार माह बाद पति ने अपनी मां के कहने पर अचानक एक बार में तीन तलाक बोलकर जिंदगी तबाह कर दी। उनका कहना है कि आलिमो को समाज में बेदारी पैदा करके इसकी रोकथाम करनी चाहिए।