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11,500 आवेदनपत्र मिले फर्जी, होंगे निरस्त

Sun, 17 Jan 2016 11:57 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
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दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए किए गए आवेदनपत्रों की जांच में 11,500 से अधिक आवेदनपत्र संदिग्ध और फर्जी पाए गए हैं। ये सभी आवेदनपत्र निरस्त होंगे।
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समाज कल्याण अधिकारी ने आवेदनों का सत्यापन न करने वाली 36 संस्थानों के खिलाफ जांच भी शुरू करा दी है। इससे संस्थानों के संचालकों में हड़कंप मच गया है।

वर्ष 2015-16 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए जिले से करीब 46 हजार आवेदन किए गए हैं। पिछले साल आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं के आवेदनों का नवीनीकरण इस बार संस्थानों द्वारा नहीं किया गया है।

इससे तमाम संस्थानों के छात्र-छात्राओं का आवेदन नहीं हो सका है। आवेदन के बाद शासन स्तर पर हुई जांच में जिले के 11,500 से अधिक आवेदन फर्जी व संदिग्ध पाए गए हैं।
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किसी में आय व जाति का प्रमाणपत्र नहीं लगा तो किसी में गलत प्रमाणपत्र लगाया गया है। इनका डाटा न मिलने के कारण आवेदनों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

आवेदनों का सत्यापन कर रिपोर्ट देने के आदेश संबंधित संस्थानों को दिए गए थे। लेकिन संस्थानों मात्र आठ हजार आवेदनों का ही सत्यापन किया है।

ऐसी स्थिति में 46 हजार में मात्र आठ हजार आवेदनों पर ही विचार हो सकता है। सत्यापन न कराने वाली 36 संस्थाओं के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं।

इसके लिए शासन ने समाज कल्याण अधिकारी ने टीम गठित करके सात दिन में रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। जांच शुरू होने के बाद संस्थाओं के संचालकों में हड़कंप मच गया है।
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समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह ने बताया कि इस बार दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए 46 हजार आवेदन हुए हैं। इसमें से 11,500 से अधिक आवेदनपत्र संदिग्ध होने के कारण निरस्त किए जाएंगे।

संस्थाओं ने आठ हजार आवेदनों का ही सत्यापन किया है। शासन की मंशा पर 36 संस्थाओं के दस्तावेजों की जांच के लिए टीम गठित की गई है।
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