रूसी क्रांति ने बदली इतिहास की धारा
रायबरेली। राजनीति विज्ञान एवं शोध संस्थान की ओर से सोमवार को प्रगतिपुरम् में रूस की समाजवादी क्रांति के सौ वर्ष पूरा होने पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। फिरोज गांधी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामबहादुर वर्मा ने कहा कि सात नवंबर 1917 को हुई रूसी क्रांति ने एक युगस्तकारी घटना थी, जिसने इतिहास की धारा ही बदल दी। संस्थान के मंत्री डॉ. बृजकिशोर ने कहा कि रूसी क्रांति के प्रभाव से एसिया, अफ्रीका के पराधीन देशों में राष्ट्रीय मुक्ति संग्राम तेज हुए। रूस सरकार ने अपनी स्वधीनता के लिए लड़ रहे राष्ट्रों को नैतिक सहायता दी। नेहरू तथा सुभाष के नेतृत्व में समाजवादी विचारों का प्रभाव बढ़ा। मजदूर संगठन बने, तथा कम्युनिष्ट आंदोलन की शुरुवात हुई। डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि रूसी क्रांति का साहित्य पर असर पड़ा। साहित्य में राजा महा राजाओं के स्थान पर किसानों मजदूरों के जीवन का चित्रण हुआ। प्रगतिशील साहित्य का विकास हुआ। इस मौके पर डॉ. रामप्रताप वर्मा, डॉ. बलवंत सिंह, अरुणेश कुमार यादव, हनुमंत भदौरिया, जगदीश यादव, रामसजीवन यादव, रामदीन विश्वकर्मा, राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने भी विचार व्यक्त किए।