रायबरेली के लालगंज में सैकड़ों की संख्या में किसानों ने रेल कोच कारखाने के गेट पर पहुंचकर ताला डाल दिया। यहां तक कि किसानों ने कर्मचारियों को भीतर नहीं घुसने दिया।
किसानों के उग्र तेवर देख प्रशासन ने पूरे सर्किल की पुलिस और पीएसी भी बुला ली थी। फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी मुस्तैद रही।
रेल ट्रैक रोकने के ऐलान से रेलवे प्रशासन भी ढीला पड़ा। दिल्ली से आकर अफसरों ने किसानों से बात की और उनको समस्याएं हल कराने का लिखित आश्वासन दिया, तब जाकर किसानों का गुस्सा ठंडा पड़ा और तीन दिन से चल रहा आंदोलन समाप्त हुआ।
बुधवार सुबह सात बजे किसानों ने कोच कारखाने के गेट पर पहुंचकर ताला डाल दिया और कर्मचारियों को भीतर जाने से पूरी तरह रोक दिया। रेल अधिकारियों के विरोध में नारेबाजी करने लगे।
किसान पिछले तीन दिनों से वंचितों को मुआवजा और नौकरी शीघ्र दिए जाने, अन्य संबंधियों को नौकरी दिए जाने, कोच कारखाने में नौकरी दिए जाने, ट्रैक मैन पदों पर नियुक्त कर्मचारियों की कोटि परिवर्तित कर अन्य विभागों में नौकरी दिए जाने, ट्रैकमैन व अन्य पदों पर नियुक्त महिलाओं को तत्काल कोच कारखाने में स्थानांतरित किए जाने की मांग को लेकर आंदोलित थे।
बुधवार को कांग्रेस विधायक अशोक सिंह भी किसानों के आंदोलन में शामिल हुए। उधर, दिल्ली से कारखाने के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अनिल हांडा व सीपीओ (मुख्य कार्मिक अधिकारी) रेनू शर्मा के अलावा अन्य अधिकारी आए।
किसानों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। सहमति बनने पर अधिकारियों ने धरनास्थल पर आकर अपने फैसलों से अवगत कराया। जिस पर आंदोलन समाप्त हुआ।
किसानों की ओर से कमलाकांत यादव, मोनू मिश्रा, एडवोकेट कुमार विवेक दुबे, विनय त्रिवेदी, राजकिशोर सिंह, इस्माइल भुट्टो शामिल रहे। वार्ता और समझौते के बाद किसानों ने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।