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मुकद्दस रमजान में जकात और फितरा का है खास महत्व : मुफ्ती जमीलुर्रहमान

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मुकद्दस रमजान में रोजा-नमाज और कुरान की तिलावत के साथ जकात और फितरा (दान या चैरिटी) देने का भी बड़ा महत्व है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है।
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कटरामेदनीगंज के मुफ्ती जमीलुर्रहमान कासमी ने बताया कि इस्लाम के मुताबिक जिस मुसलमान के पास भी इतना पैसा या संपत्ति हो कि उसके अपने खर्च पूरे हो रहे हों और वो किसी की मदद करने की स्थिति में हैं तो वह जकात देने का पात्र है।
आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है, उसका 2.5 फीसदी हिस्सा किसी गरीब या जरूरतमंद को दिया जाता है, जिसे जकात कहते हैं। असल में ईद से पहले यानी रमजान में जकात व फितरा अदा करने की परंपरा चली आ रही है।
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क्या है जकात
अगर परिवार में पांच सदस्य हैं और वो पैसे कमाते हैं तो सभी को जकात देना फर्ज माना जाता है। अगर कोई बेटा या बेटी भी नौकरी या कारोबार के जरिये पैसा कमाते हैं तो सिर्फ उनके मां-बाप अपनी कमाई पर जकात देकर नहीं बच सकते हैं, बल्कि बेटे या बेटी को भी जकात देने की रवायत है।

क्या है फितरा
फितरा वो रकम होती है जो खाते-पीते, साधन संपन्न घरानों के लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देते हैं। ईद की नमाज से पहले इसकी अदायगी जरूरी होती है। फितरा की रकम भी गरीबों व जरूरतमंदों को दी जाती है।
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