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Pratapgarh News: फार्मासिस्टों पर काम का बोझ बिगाड़ रहा स्वास्थ्य विभाग की सेहत

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सरकारी अस्पतालों में लगातार फार्मासिस्टों की घटती संख्या और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर बढ़ते दबाव ने विभाग की चिंता बढ़ाई है। विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जिले में फार्मासिस्ट के 173 पद स्वीकृत हैं लेकिन अस्पतालों में तैनाती सिर्फ 105 की है। उनके भरोसे मरीजों की सेहत है।
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जिले में 29 सीएचसी, 62 पीएचसी के साथ ट्रॉमा सेंटर का संचालन होता है। मानक के अनुसार पीएचसी में एक, सीएचसी में तीन और बड़े अस्पतालों में पांच-पांच फार्मासिस्टों की तैनाती होनी चाहिए।
इसके अलावा पोस्टमार्टम हाउस में दो, ड्रग वेयर हाउस और सीएमएसडी में दो-दो फार्मासिस्ट की तैनाती होनी चाहिए। इस हिसाब से 173 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ 105 की है। कई सीएचसी में तीन की जगह एक ही फार्मासिस्ट तैनात हैं। मजबूरी में उनको 24 घंटे सेवाएं देनी पड़ रही हैं।
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दवा वितरण, स्टॉक प्रबंधन, इमरजेंसी में मरहम-पट्टी और टीकाकरण अभियान में उनकी भूमिका अहम की गई है। बावजूद इसके एक-एक फार्मासिस्ट पर दो से तीन गुना काम का बोझ है।
वर्जन-
ड्यूटी के चलते अवकाश नहीं मिल पा रहा है। काम की अधिकता से फार्मासिस्ट मानसिक रूप से परेशान हैं। संगठन की ओर से फार्मासिस्टों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग लगातार की जा रही है। - अनिल पांडेय, अध्यक्ष, डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन
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वर्जन
शासन से फार्मासिस्ट की नियुक्ति की मांग की गई है। जल्द ही अस्पतालों के रिक्त पदों पर तैनाती की जाएगी। - डॉ. एस हैदर, डिप्टी सीएमओ।
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