सीवर लाइन बिछाने के दौरान जल निगम को नियम व शर्तों का पालन न कराने पर ही सीवरलाइन बिछाने का काम बंद करना पड़ा। वन विभाग पर ठीकरा फोड़कर विभाग के अधिकारी खुद को पाक साफ करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। जिम्मेदारों की कारस्तानी के चलते अभी तक सीवरेज योजना का लाभ शहरियों को नहीं मिल पा रहा है।
पूर्व सांसद अक्षय प्रताप सिंह के प्रयास से वर्ष 2005 में शहरियों को सीवर लाइन का तोहफा मिला था। वर्ष 2009 में करोड़ों की लागत से शुरू हुआ कार्य आज भी पूरा नहीं हो सका। जल निगम के अफसर भले ही दावा कर रहे हैं कि मार्च ताह तक शहरियों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया जाएगा मगर राह आसान दिखाई नहीं पड़ रही है। इलाहाबाद-फैजाबाद हाईवे अजीतनगर के करीब सीवर पाइप लाइन डालने के दौरान कार्यदाई संस्था ने पेड़ काट डाले।
मामला संज्ञान में आने के बाद वन विभाग ने जल निगम और नेशनल हाईवे के अधिकारियों को पत्र भेजकर पेड़ पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार से अनुमति लेने के बाद ही कटवाने को कहा। पत्र मिलने के बाद ही विभाग को बहाना मिल गया। करीब एक माह से सीवर लाइन का काम बंद पड़ा है। खुदाई के दौरान मलबे से नाले भी बंद हो गए हैं। पाइपें भी अराजकतत्व तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद जल निगम ने कार्य पूरा कराने के लिए कोई ठोस पहल नहीं किया। नतीजा अभी भी काम अधर में लटका हुआ है। जल निगम की अनदेखी के चलते सीवरेज लाइन बिछाने का ही काम बंद पड़ा है तो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से कनेक्ट कब होगा। यह तो आने वाला समय ही बताएगा।