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45 साल बाद दीपावली पर तुलाराशि व रविवार का अदभुत संयोग

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diwali
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45 साल बाद दीपावली पर तुला राशि व रविवार का अद्भुत संयोग बना है। मां महालक्ष्मी व तंत्र-मंत्र के सिद्धि के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। देवी उपासना के लिए दुर्लभ संयोग है। पूजन-अर्चन से सुख समृद्धि होगी।
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आम तौर पर दीपावली चित्रा नक्षत्र में पड़ती है। इस बार पर्व पर चंद्रमा का तुला राशि में प्रवेश अहम है। आचार्य आलोक मिश्र ने बताया कि इस बार चंद्रमा का तुला राशि में प्रवेश हो जाने से दीपावली बहुत ही खास है। तुला राशि में देवी उपासना बहुत ही लाभप्रद मानी जाती है। इसके अलावा दीपावली पर रविवार का दिन भी शुभ फलकारक है।
बताया कि गोधूली बेला मेें दीपदान शुभ होता है। यह मुहूर्त सूर्यास्त 6.00 बजे से शाम 7.15 तक है। इसमें दीपदान होगा। बताया कि वृष लग्न एवं प्रदोषकाली बेला पूजन के लिए विशिष्ट मुहूर्त है। यह शाम 6.45 से 8.41 तक है। इस मुहूर्त में घरों, दुकानों व प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी की विशेष पूजा होगी।
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तंत्र-मंत्र के लिए महानिशीथ काल
दीपावली पर्व पर मंत्रों की सिद्धि की जाती है। यह दिन बहुत ही अहम होता है। तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए दीपावली पर्व पर महानिशीथ काल शुभ होता है। रात 12.20 बजे से 3.27 तक यह काल है।
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एक नजर मुहूर्त पर
दीपदान- गोधूलि बेला में शाम 6 बजे से 7.15 तक
विशिष्ट पूजन- वृष लग्न में शाम 6.45 से 8.41 तक
तंत्र- मंत्र सिद्धि-महानिशीथकाल सिंह लग्र में रात 12.20 से 3.27 तक
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