अमर उजाला के अभियान अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल के तहत गुरुवार को तरुण चेतना संस्था की तरफ से पट्टी तहसील के सरायमधई में विधिक अधिकार जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं को कानूनी जानकारी दी गई।
अधिवक्ता मुन्नी बेगम ने बताया कि कोई भी महिला घरेलू हिंसा कानून के तहत डीआईआर दर्ज कराकर उसी घर में रहने का अधिकार पा सकती है जिसमें वह रह रही है। विवाहित होने की स्थिति में अपने बच्चे के पालन पोषण के लिए मुआवजा मांगने का भी अधिकार है। उन्होंने बताया कि किसी भी विवाहित महिला को दहेज के लिए प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है।
तलाक के बाद किसी भी महिला को गुजारा भत्ता, स्त्री धन व बच्चों की कस्टडी भी पाने का अधिकार होता है। यहां तक की भारतीय कानून के तहत लिव इन रिलेशन में महिला पार्टनर को वही दर्जा प्राप्त है, जो किसी विवाहित महिला को मिलता है और इससे पैदा हुई संतान भी वैध मानी जाएगी। तरुण चेतना के निदेशक नसीम अंसारी ने बताया कि उत्तराधिकार अधिनियम के तहत विवाहित या अविवाहित महिला को अपने पिता की संपत्ति में बराबर का हिस्सा पाने का अधिकार है। अंसारी ने बताया कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न विरोधी कानून के तहत संस्थानों में एक समिति का गठन अनिवार्य है। जहां कोई भी उत्पीड़ित कामकाजी महिला शिकायत दर्ज करा सकती है।
इस अवसर पर चाइल्ड लाइन प्रतापगढ़ के काउंसलर व पैरालीगल वालंटियर मोहम्मद शमीम ने बताया कि यदि पुलिस किसी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज करती है तो उसकी नि:शुल्क कापी देना पुलिस का कर्तव्य है। ग्राम प्रधान मुख्तार अहमद, सावित्री देवी, रेशमा, शाहिना बानो, अनवरी बेगम, छतहिन, अनुराधा, राकेश कुमार गिरी व शकुंतला देवी मौजूद रहीं।