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बतानी होगी वजह, मरीज को क्यों किया रेफर

Sat, 03 Sep 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
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Doctor
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 गंभीर मरीजों को देखते ही रेफर का कागज थमाकर अपनी जान छुड़ाने वाले डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। अब वह अपनी मर्जी से मरीज को रेफर नहीं कर सकेंगे। उन्हें मरीज को बताना होगा कि अस्पताल में ऐसी कौन सी सुविधा नहीं थी जिसके कारण मरीज को इलाहाबाद या कहीं और के लिए रेफर किया गया। शासन ने सीएमओ को पत्र भेजकर सरकारी अस्पतालों में एक रजिस्टर रखवाने के लिए निर्देश दिया है।
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मरीज के भर्ती होने से लेकर उपचार, रेफर या फिर डिस्चार्ज करने तक  का इस रजिस्टर में पूरा ब्यौरा दर्ज किया जाएगा। ऐसा न करने पर चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में हल्की सी दिक्कत बढ़ते देख चिकित्सक तत्काल मरीज को रेफर कर देते हैं। सीएचसी और पीएचसी पर चिकित्सक मरीजों को भर्ती करके परेशानी से बचने के लिए दो घंटे तक रखते हैं। इसके बाद जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं।  एएनएम सेंटरों पर रात में एएनएम गायब रहती हैं इसके चलते गर्भवती महिलाओं को सीएचसी या फिर पीएचसी जाना पड़ता है। यहां दो से चार घंटे रखने के बाद चिकित्सक जिला महिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। महिला अस्पताल की चिकित्सक जांच रिपोर्ट देखने के बाद कहीं ब्लड की कमी तो कहीं बच्चे के अंदर कमी बताकर इलाहाबाद रेफर कर देती हैं। डॉक्टरों की मनमानी की शिकायतें मिलने के बाद शासन ने अब उनकी नकेल कसने की तैयारी कर ली है। इसी के तहत नई व्यवस्‍था लागू की जा रही है।
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सरकारी अस्पतालों में शासन के निर्देश पर एक रजिस्टर रखने के लिए कहा गया है। मरीज को रेफर करने के पहले चिकित्सक बताएंगे कि किन कारणों से रेफर किया गया है।
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यूके पांडेय, सीएमओ।

 
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