हिंद महासागर में उठे तूफान से बेल्हा कांप उठा। गायब हो चुकी ठंड बर्फीली हवाओं व हल्की बरसात के साथ फिर लौट आई। हल्के कपड़ों में घूमने वाले लोग ऊनी कपड़ों में नजर आए। अचानक खराब हुआ मौसम लोगों की सेहत पर भी भारी पड़ा। सर्दी, जुकाम और बुखार ही नहीं सिर दर्द के मरीजों की जिला अस्पताल के इमरजेंसी में भरमार रही। तापमान में काफी गिरावट रही और पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे।
शनिवार को दूसरे पहर से मौसम का मिजाज बिगड़ना शुरू हुआ। देर शाम तक बादलों ने आसमान को ढंक लिया और सर्द हवाओं का चलना शुरू हो गया। रात करीब एक बजे से बारिश शुरू हो गई। बरसात और ठंडी हवा के चलते गलन बढ़ गई। मौसमविदों ने कुल छह मिलीमीटर बरसात रिकार्ड की। न्यूनतम तापमान 15.5 व अधिकतम 20.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अनुमान लगाया गया कि दो से तीन दिन तक इसी तरह का मौसम रहेगा। बारिश की वजह से शहर की कई सड़कों पर पानी भर गया। रविवार सुबह भी बूंदाबांदी हुई और पूरे दिन बादल छाए रहे। ठंडी हवा लोगों को सताती रही। विगत दिनों तेज धूप देख गर्मी का अहसास कर रहे जो घर से हल्के कपड़े में निकल रहे थे वे ऊनी कपड़ों पहन कर बाहर आए। गर्मी से अचानक मौसम का ठंड में बदलना लोगों की सेहत पर भारी पड़ा।
मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या जिला अस्पताल की इमरजेंसी और प्राइवेट अस्पतालों में खूब रही। कृषि रक्षा अधिकारी अमित जायसवाल ने कहा कि इतनी बारिश से कोई नुकसान नहीं है। यदि अब बरसात हुई तो गेहूं व खोदने लायक हुए आलू का नुकसान हो सकता हे। क्योंकि पानी खेत में भरने से आलू सड़ सकता है और गेहूं की फसल गिरने से दाने पतले हो जाएंगे। अचानक खराब हुए मौसम की वजह शनई अनुसंधान केन्द्र के मौसम प्रेक्षक सुरेन्द्र प्रजापति ने हिंद महासागर में उठे तूफान को बताया।