‘बाप रे बाप! इतनी ठंडी बा किगोड़ से हाथ तक सुन्न होइ जात बाटै। इ त जान लेइ पर उतारू बा। नहाय कै हिम्मतै नाहीं पड़त, बस मन कहत बा कि रजाई से निकलबै न करी। काम रहा तउन आए पड़ा, हे भइया तनीके बगल होत्या तौ हमहू हाथ सेक लेइत...।’ यह किसी फिल्म का डायलॉग नहीं बल्कि ठंड से कांपते जिले के लोगों की जुबानी है। बुधवार की रात बर्फीली पुरवा हवा से पारा लुढ़का तो रात कांप गई।
सुबह का आलम यह रहा कि हर कोई सिकुड़ा बटुरा नजर आया। विगत तीन दिन की तरह गुरुवार को भी धूप नहीं हुई। पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे। हल्का सा धुएं की तरह कोहरा उड़ता रहा। वातावरण में नमी बढ़ने से असहनीय गलन लोगों को सताती रही। जी हूम कर घर से निकले लोग हर दस कदम पर अलाव खोजते रहे। घरों में बच्चे तो बच्चे बड़े व युवा भी रजाई में दुबके रहे। कुंडा क्षेत्र में ठंड लगने से एक अधेड़ की मौत हो गई।
गुरुवार का मौसम इतना ठंडा था कि हर कोई बदन के जोड़ में जकड़न महसूस कर रहा था। बगैर किसी कारण सफर करने वालों की आंख और नाक से पानी ढरकता रहा। जूते और मोजे के अंदर ऐसा महसूस हुआ जैसे बर्फ की सिल्ली पर पांव रख कर खड़े हों। रात से पूर्वा हवा ढुरकी तो सुबह चार बजे तक करवट नहीं ली। बर्फीली पहाड़ियों से होकर यहां पहुंची हवा की वजह से न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस रहा। दोपहर के वक्त का तापमान 13.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ। कई दिन से पड़ रही ठंड को देख सहमे सूर्यदेव भी रजाई से सिर नहीं निकाल रहे।
लगातार चार दिन से आसमान में छाए बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे। कोहरा भी हल्के धुएं की तरह उड़ता रहा। ऐसी स्थिति में जमीन का तापमान यानी वातावरण में सुबह आद्रता (नमी) बढ़ कर 100 पर पहुंच गई। दोपहर के समय भी यह नमी 91 फीसदी रही। शाम चार बजे के बाद गलन और बढ़ गई। कुंडा के बेधनगोपालपुर सुखऊपुरवा निवासी नौसाद अहम (42) की ठंड लगने से मौत हो गई। वह क्षेत्र में लोगों का इलाज कर परिवार चलाता था। मौसम विदन अवधनारायण द्विवेदी ने कहा कि हवा ने करवट न लिया तो शुक्रवार को भी मौसम खराब ही रहेगा। अनुमान है कि ऐसी स्थिति में बूंदाबांदी भी हो सकती है।