ठंड जान लेेने पर उतारू है। धुंध और कोहरे के चलते जिंदगी ठहर गई है। सूर्यदेव खुद दुबके हुए हैं। दो दिन से उनका दर्शन नहीं हुआ। अस्पतालों में ठंड के शिकार लोगों की भीड़ लगने लगी है। गर्म कपड़े नाकाम साबित हो चुके हैं। क्या बच्चे क्या युवा, ठंड के कोप से बचने के लिए सभी अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। न्यूनतम ही नहीं अधिकतम पारा भी लुढ़कने लगा है। शुक्रवार को अधिकतम पारा 12.7 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम 7.9 डिग्री सेल्सियस मापा गया।
बृहस्पतिवार को अचानक ठंड ने पलटी मारी तो लोग हैरान रह गए। उन्हें लगा कि दो दिन तक निकली धूप से जो गर्मी मिली थी उसे ठंड ने वापस ले लिया। पूरे दिन धुंध छाई रही। कोहरा भी दोपहर तक टपकता रहा। यही हाल शुक्रवार को भी रहा। हालांकि आज कोहरे का रूप कल जैसा नहीं था, लेकिन सूर्यदेव फिर भी बाहर आने का साहस नहीं दिखा सके। इससे सड़कों और बाजारों में वह चहल-पहल नहीं दिखी जो होनी चाहिए थी। बस वही लोग सड़कों पर निकल रहे थे जिन्हें बहुत जरूरी था। ठंड का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कमरे में रहने और मोजों-दस्ताओं के बीच भी हाथ और पांव की उंगलियों के खून जम जा रहे थे। इसके चलते लोगों के कमरों में या तो अंगीठी जल रही थी या फिर हीटर और ब्लोवर से खून को तरोताजा रखने की कोशिश की जा रही थी।
घरों और दुकानों के सामने अलाव जला लोग ठंड दूर भगाने में लगे थे। सरकारी दफ्तरों का भी यही हाल था। ज्यादातर दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही, जो आए भी थे वे काम की जगह अलाव के पास थे। वातावरण में सुबह के वक्त 95 प्रतिशत नमी रिकार्ड की गई जबकि दोपहर में 81 प्रतिशत रही। रात में बादलों के आ जाने से कोहरे का असर खास नहीं रहा। सारा दिन पश्चिमी व उत्तरी हवा ढुरकती रही। स्थिति यह रही कि ठंड के चलते लोग सुबह देर से बिस्तर छोड़ सके। ऐसे में पूरी दिनचर्या प्रभावित रही। खास बात यह थी कि खुद के साथ लोग बच्चों को भी गर्म कपड़ों में लपेटे रहे। ठंडी हवा से बचने के लिए निजी चारपहिया व किराए के साधन जैसे रोडवेज बस आदि के अक्सर खुले रहने वाले सारे शीशे बंद रहे। अस्पतालों में मरीजों की खासी भीड़ रही। जिला अस्पताल के अलावा शहर के निजी अस्पतालाें में भी मरीज बारी का इंतजार करते रहे। रोगियों में ज्यादातर बच्चों व वृद्धाओं की संख्या रही। अधेड़ों व युवकों की तादाद काफी कम थी। ठंड से कांपते लोग छिन-छिन पर चाय की चुस्की लगाते रहे। हर कोई कुछ दूर चलने के बाद जली आग देखते ही हाथ सेंकने से खुद को नहीं रोक सपा। अचानक लौटी ठंड के कारण ऊनी कपड़ों की खरीद फिर बढ़ गई है। कांपते लोगों की जेब से दुकानदार मुंह मांगी रकम वसूल रहे हैं। कई परत कपड़ों में लिपटे होने पर भी ठंड लोगों को कंपाती रही।
ठंडी के तीखे तेवर से राहत की उम्मीद में रूम हीटर, गीजर जैसे विद्युत चालित यंत्रों का संचालन बढ़ गया है। बिजली विभाग दो दिन से बढ़े लोड को लेकर हलकान है। अधिक खपत हो रही बिजली की भरपाई वह कहां से करे। इसके लिए डीएम के निर्देश पर विभाग इस ठंडी में बिजली चोरों के खिलाफ अभियान की मुहिम तेज करने जा रहा है। लकड़ी कोयला व्यापारियों की मानें तो उनके मुताबिक ठंड बढ़ने के साथ कोयले की खपत में भी इजाफा हुआ है।