रविवार को दिनभर धुंध छाई रही। दोपहर तक धुंध ने सूर्यदेव को भी ढक रखा था। आसमान में बादल भी बने रहे। बहुत हल्की धूप हुई। दिवाली के बाद अब रात भी सर्द होने लगी है। इन सबके बीच दिन आैर रात के तापमान में अंतर देखने को मिल रहा है। जिस वजह से लोगों की जरा सी लापरवाही उन्हें बीमार कर दे रही है। इस समय खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ख्याल अधिक रखने की जरूरत है। ो रात में गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें।
उधर, दिन-रात के तापमान में अंतर होने के कारण दमा के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। उधर, सनई अनुसंधान केंद्र के केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉक्टर मनोज त्रिपाठी का दावा रहा कि नमी के कारण धरती का प्रदूषण ऊपर न जाकर बीच में फंस गया। जिससे दिनभर धुंध छाई रही। डॉक्टरों का मानना है कि इस तरह की धुंध अगर बनी रही तो लोगों को सांस लेने में दिक्कत होगी।
दीपावली बीतने के बाद ठंड अपना असर दिखाने लगी है। दिन और रात का तापमान धीरे-धीरे गिर रहा है। न्यूनतम तापमान 13.7 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। जबकि अधिकतम तापमान भी 29 डिग्री के करीब पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिक मनोज त्रिपाठी की मानें तो अब इसी तरह तापमान में अंतर कम हो जाएगा। इससे ठंड और बढ़ेगी। वहीं मौसम में हो रहे इस बदलाव से जुकाम और बुखार के मरीजों के साथ दमा के मरीजों की मुश्किल बढ़ गई है। जिला अस्पताल के मेडिकल अफसर डॉ. मोहित शुक्ला के मुताबिक, सुबह और शाम के साथ रात में पड़ रही ठंड में बिना गर्म कपड़े पहने निकलना खतरनाक है। खास तौर पर दमा और हर्ट के मरीजों को इन दिनों गर्म कपड़े पहन कर ही निकलना चाहिए। तापमान में गिरावट और नमी की वजह से प्रदूषण धुंध बनकर जम जा रहा है। वह आसमान तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे दमा के मरीजों को ज्यादा दिक्कतें हो रही हैं। ऐसे में उनकी जान चली जा रही है। डॉक्टर मोहित शुक्ला ने बताया कि दो दिनों में दस दमा और हर्ट के मरीजों की जान जा चुकी है।