बेलखरनाथ के कई गांवों में है संकट, प्रदूषित पानी के चलते मुश्किल में लोग
विकास खंड बेलखरनाथ के कई गांवों में पेयजल का संकट बन गया है। गांव के लोग स्वच्छ पानी की जगह पर प्रदूषित पानी पीने को विवश हैं। हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि नलों से पानी की जगह से कीड़े निकल रहे हैं। अधिकांश हैंडपंपों का पानी खराब हो गया है। कुछ घंटों के बाद बर्तन में रखे पानी का रंग पीला हो जा रहा है। बर्तन का रंग भी पीला हो जा रहा है। ऐसी दशा में गांव के लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
बेलखरनाथ के गांव करनपुर खूझी, खूझीकला, जगदीशगढ़, गोलापुर, यहियापुर में हैंडपंपों से प्रदूषित पानी निकल रहा है। करनपुर खूझी गांव की यादव बस्ती में हैंडपंप में से पानी के साथ बड़े-बड़े कीड़े निकल रहे हैं। गांव के लोग हैंडपंप में कपड़ा बांधकर किसी तरह पानी ले रहे हैं। प्रदूषित पानी पीने की वजह से गांव के नौनिहाल व लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। गांव के कृष्णा (6), राज यादव (8), प्रियांशु, श्लोक समेत दर्जनों बच्चे दूषित पानी के चलते बुखार व डायरिया से पीड़ित हैं। गांव के लोगों ने इस समस्या की कई बार शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। यही हाल कमोवेश कई अन्य गंावों का है। यहां खारे पानी से निजात दिलाने के लिए बेलखरनाथ धाम के समीप एक पेयजल टंकी की स्थापना की गई, लेकिन उसका भी संचालन ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है। प्रशासन द्वारा जल जांच के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाता है। सही रिपोर्ट क्या है, इसकी मानीटरिंग कभी नहीं की गई। गांव के लोग मजबूरी में पानी की जगह बीमारी गटक रहे हैं।
जल संचयन को लेकर फिक्रमंद नहीं अफसर
स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का दावा गांवों में पूरी तरह फेल है। गांवों में पेयजल संकट, प्रदूषित पानी से निजात दिलाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधि व जिम्मेदार अफसर सिर्फ वादे करते नजर आ रहे हैं। बेलखरनाथ, शिवगढ़, मंगरौरा ब्लाक को डेंजर जोन में पूर्व में ही रखा जा चुका है। यहां ट्यूबबेल व गहरे बोरिंग पर रोक लगी हुई है। ऐसी दशा में प्रशासनिक अमले द्वारा जल संचयन के लिए जागरूकता अभियान भी नहीं चलाया गया है और न ही दूषित पेयजल से ग्रामीणों को निजात मिल पा रही है। जल संचयन को लेकर अफसर उदासीन बने हुए हैं। गांव के तालाबों, कुओं में पेयजल की उपलब्धता के लिए भी प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।