विकास खंड लालगंज में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। जलस्तर घटने के कारण हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है तो कुओं का अस्तित्व खत्म हो गया है। यहां से होकर गुजरने वाली लोनी नदी सिमट चुकी है। तालाबों की हालत भी बदतर है। कहीं भी तालाबों में पानी नहीं नजर आ रहा है। मई-जून में भीषण गर्मी पड़ने के बाद हालात और बिगड़ेंगे।
विकास खंड की 33 ग्राम पंचायतों में औसत जलस्तर कहने को तो 12 मीटर है लेकिन कई इलाके ऐसे हैं जहां जलस्तर 15 मीटर से भी नीचे चला गया है। जलस्तर का घटना निरंतर जारी है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार लगभग आठ फिट गिरावट दर्ज की गई है। इसका खामियाजा लालगंज की जनता को भुगतना पड़ रहा है। पेयजल व सिंचाई के मुख्य साधन कुओं और नदियों का वजूद मिटने के कगार पर है। लोनी नदी का अस्तित्व भी संकट में पड़ गया है।
लोनी नदी सूखकर रेगिस्तान हो गई है। गर्मी की बात तो दूर है अक्तूबर माह से ही लोनी नदी में बूंद भर पानी नहीं दिखा। सिंचाई के लिए नहरें खुदवाई गईं। लेकिन अन्य नहरों में पानी तो दूर की कौड़ी है। अंग्रेजों के जमाने की सगरा रजबहा में भी पानी कभी-कभी ही रहता है। शासन ने मनरेगा के तहत ब्लाक में करीब 400 तालाब बनवाए हैं। इसमें पानी संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन एक भी तालाब में पानी नहीं है। मुख्यमंत्री के जल बचाओ अभियान के तहत 50 तालाब बनवाए तो गए मगर फरवरी महीने से ही इनमें धूल उड़ रही है। तालाब, कुआं, नदी, नहर ने किसानों की कमर तोड़ दी तो ब्लाक में लगे 2800 इंडिया मार्का हैंडपंप जलस्तर खिसकने से जवाब देने लगे हैं। करीब 400 हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है।