कभी देशी-विदेशी परिंदों की चहचहाहट से गुलजार रहने वाला बेंती पक्षी बिहार इन दिनों सूना-सूना सा है। दिनभर चिड़ियों के चहचहाने वाली आवाज भी गायब है। तालाब के किनारे सुबह उमड़ने वाला पक्षियों का झुंड गायब हो गया है। पक्षी बिहार के तालाब के सूखने के कारण विदेशी मेहमानों के साथ देशी परिंदों ने भी कहीं और ठिकाना बना लिया है। पक्षी बिहार का सबसे बड़ा तालाब अप्रैल में ही सूख गया है। हालत यह हो गई है कि इसमें बच्चे खेलने के लिए जाने लगे हैं।
क्षेत्र के बेंती में पक्षी बिहार बनाया गया था। गंगा का किनारा होने के कारण इसमें बराबर पानी आता रहता था। इससे तालाब में पानी की कमी नहीं होती थी। यही कारण था कि यह पक्षी बिहार सालभर देशी-विदेशी परिंदों से गुलजार रहता था। सुबह-शाम तालाब के किनारे विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखने को मिलते थे। उनकी चहचहाहट सुबह होने का एहसास कराती थी तो दिन ढलने की जानकारी भी यही उड़ते हुए पक्षी दे जाते थे। लेकिन इस बार गर्मी ने ऐसा रिकार्ड तोड़ा कि उनकी आवाज भी सुनना मुश्किल हो गया है। तालाब में पानी न आने के कारण उन्होंने कहीं और अपना ठौर ढूंढ लिया है। यह तालाब लगभग सूख चुका है।
ठंडी में यहां पहले साइबेरियन पक्षी प्रवास करने आते थे, लेकिन इस बार वह भी नहीं आए। पानी न होने के कारण पक्षियों ने भी गंगा के किनारे के जंगलों में अपना ठिकाना बना लिया है। पक्षी बिहार में पानी की कमी होने के कारण तमाम दुर्लभ जानवर भी अपनी जगह छोड़कर पलायन करने लगे हैं। इसके चक्कर में वह अपनी जान भी गवां रहे हैं। अभी दो महीने के अंदर पानी की कमी के कारण ही हिरन के बच्चे अपने रहने के स्थान से बाहर निकले तो कुत्तों ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। फिलहाल वन विभाग अब इसकी ठीक तरीके से देखभाल भी नहीं कर पा रहा है। बरसात के दौरान यदि इस तालाब का पानी रोकने का प्रयास किया जाता तो शायद कुछ दिनों तक पानी रुकता, लेकिन किसी ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली।