इस बार भी गर्मी में लाखों लोगों को पानी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। प्रशासनिक इंतजाम जिले में काफी बदतर हैं। कई स्थानों पर अभी से ही जलसंकट उत्पन्न हो गया है। आने वाले दिनों में यहां पानी के लिए हाहाकार वाली स्थितियां दिख रही हैं। इसके बाद भी अधिकारियों की आंख में बंधी पट्टी खुलने का नाम नहीं ले रही है। गर्मी ने धीरे-धीरे अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे मौसम में पानी की खपत बढ़ने लगी है। पेयजल व्यवस्था की हालत यहां काफी बदतर है। जनपद की 31 लाख आबादी के बीच जलनिगम के जरिए अब तक तकरीबन 55 हजार हैंडपम्प लगाए गए हैं। इन हैंडपम्पों के अलावां 85 पानी की टंकियां बनी हैं।
विभागीय आंकड़े बताते हैं कि जिले में दो दर्जन से अधिक पानी की टंकियों का निर्माण अभी अंतिम दौर में है। विभाग के दावे और जमीनी हकीकत में काफी अंतर बताया जाता है। सूत्रों की मानें तो विभागीय लिखापढ़ी में 400 हैंडपम्प ऐसे हैं जिनकी मुंडियां यानी ऊपरी हिस्सा गायब हैं। सैकड़ों हैंडपंप ऐसे हैं जिनका बोर तो हुआ मगर उस पर मशीन नहीं बैठाई जा सकी। डेढ़ दर्जन से अधिक पानी की टंकिया जलापूर्ति में असमर्थ बताई जाती हैं। हालांकि विभाग मात्र 4 टंकियों के खराब होने का राग अलाप रहा है। विभाग के लोग नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि हैंडपम्पों व टंकियों की दशा बेहद खराब है। गर्मी में विभागीय व्यवस्था से लोगों का गला तर हो पाना मुश्किल होगा।