जिले के हालात बुंदेलखंड जैसे होते जा रहे हैं। यहां का भू-जलस्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। साल भर में पानी 10 फीट नीचे खिसक गया है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने जिले के 17 विकास खंडों में 12 ब्लाकों को डेंजर जोन घोषित कर दिया है। इनमें नई बोरिंग पर रोक लगा दी गई है। अधिकांश क्षेत्र में पीने का पानी दुर्लभ हो गया है। मनुष्य के साथ ही पशु, पक्षियों के लिए भी मुसीबत बढ़ती जा रही है।
हालात से निपटने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था यह कि जिले में मनरेगा के तहत तालाब तो खोदे गए हैं, मगर पानी भरवाने की कोई पहल नहीं की गई। बीते सप्ताह हुए सर्वे के अनुसार जलस्तर 70 फीट पर पहुंच गया है जबकि पिछले साल ही पानी 60 फीट पर था। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी से आने वाले दिनों में पानी और नीचे जाने के आसार हैं। ऐसे में पेयजल संकट का और गहराना तय है। जिला प्र्रशासन ने जिले के 12 ब्लाकों को डेंजर जोन घोषित कर दिया है। सबसे खराब स्थिति सदर, संडवाचंद्रिका, लक्ष्मणपुर, सांगीपुर, लालगंज, मंगरौरा, आसपुरदेवसरा, पट्टी, शिवगढ़, गौरा, मानधाता ब्लाक की है।