जिले में एक मात्र विकास खंड संडवाचंद्रिका ऐसा है, जहां न तो नहर है और न ही पर्याप्त पानी मिलने का स्त्रोत। विकास खंड के आंशिक भाग से गुजरने वाली सई नदी भी मौजूदा समय में नाले का रूप ले चुकी है। इससे पानी तेजी से पाताल की ओर जा रहा है। करीब 488 हैंडपंप रीबोर का इंतजार कर रहे हैं। तकरीबन 403 तालाब चट्टान बन गए हैं। हाल ही में हुए जांच में खुलासा हुआ है कि बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष जलस्तर लगभग 18 फीट नीचे खिसक गया है।
विकास खंड के 70 ग्राम पंचायतों में गांव के लोगों की प्यास बुझाने के लिए करीब 6241 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हुए हैं। इनमें तकरीबन 1012 हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया तो ग्रामप्रधानों के मरम्मत कराने के बाद से पीने लायक पानी दे रहे हैं। जबकि 488 हैंडपंपों ने तोबा बोल दिया है। इन हैंडपंपों के रीबोर हुए बगैर पानी नहीं निकलने वाला है। इंडिया मार्का हैंडपंप की तरह ही इस ब्लाक में निजी पंपसेट लगे हुए हैं। लघु सिंचाई विभाग के सर्वे के अनुसार करीब 5489 निजी पंपसेटों से किसान खेतों की सिंचाई करते हैं। इसमें अधिकांश पंपसेटों ने पानी देना बंद कर दिया है। आम किसान धान और गेहूं की ही खेती करते हैं, तो वर्तमान समय में उन्हें खेतों की सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है।
भीषण गर्मी और तपिश से पानी का जलस्तर दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। मगर इस दिशा में अभी तक संबंधित विभाग की ओर से ठोस पहल नहीं हुई है। 70 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत 403 तालाबों की खुदाई हुई थी, मगर एक भी तालाब में पानी है। इससे पशु-पक्षियों को प्यास बुझाने के लिए भटकना पड़ रहा है। अगर जलस्तर सुधारने के लिए जल्द ही कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया तो, भविष्य में पेयजल का संकट गहरा सकता है। जगदीश सिंह, प्रभारी जेई एमआई, संडवा चंद्रिका का कहना है कि पर्याप्त बरसात नहीं होने और क्षेत्र में नहर और नदियां नहीं होने से जलस्तर लगातार नीचे खिसक रहा है। बीते वर्ष जलस्तर जहां 60 फीट पर था, वहीं इस वर्ष करीब 78 फिट पर पहुंच गया है। अगर पर्याप्त बरसात नहीं हुई, तो पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा। नलकूप विभाग ने ब्लाक में दस ट्यूबेल लगा रखा है। अभी तक इन नलकूपों से निकलने वाले पानी से किसान खेतों की सिंचाई करते थे, लेकिन फरवरी से इन नलकूपों ने तोबा बोल दिया है। संडवा चंद्रिका, गौरा (कोल), चौबेपुर, डगरी, कमालुद्दीनपुर, शिवराजपुर, पूरेपरमेश्वर गांव में राजकीय नलकूप जलस्तर नीचे खिसकने से ठप हो गए हैं।