प्यास बुझाने के लिए लगे हैंडपंपों के तोबा बोलने से क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है। क्षेत्र के 33 ग्राम पंचायतों के लिए पानी का बड़ा सहारा बनी बकुलाही में बूंद भर पानी है। इससे पशु-पक्षियों के साथ जंगली जानवर बेहाल हैं। मानधाता ब्लॉक के 101 ग्राम पंचायतों के लोगों को प्यास बुझाने के लिए लगभग 4200 हैंडपंप लगे हैं। इनमें से करीब 450 हैंडपंप ऐसे हैं जो एक माह से पानी उगलना बंद कर दिए हैं। इससे ग्रामीणों को प्यास बुझाने के लिए दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। वैसे तो क्षेत्र बकुलाही नदी और नहरों से घिरा हुआ है, मगर इन दिनों नहरों में जहां धूल उड़ रही है, वहीं बकुलाही में बूंद भर पानी नहीं है।
33 ग्राम पंचायतों के हजारों लोगों के लिए एक बड़ा सहारा बनी बकुलाही के सूखने से पानी का हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। लंबे समय से बरसात नहीं होने और नहरों, तालाबों के सूखने से इलाके के पौराणिक तालाबशांतनु, खुइलन, चनेवरा सूख जाने से आम लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं। उसके बाद भी प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। शारदा सहायक नहर क्षेत्र के बीरमपुर, पितईपुर, मझिगवां, नौवापुर, मल्हूपुर, गुडरु, नूरपुर,दिवैनी,छितपालगढ़,भगवानपुर, धीरगंज, मल्हूपुर में छह माह से पानी नहीं आया है। नहर में पानी आने से आसपास के तालाबों में पानी भर जाता था। मगर जलापूर्ति नहीं होने से ताबाल चट्टान बन गए हैं।