तहसील क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं आने से किसानों के चेहरे लटक गए हैं। पानी की किल्लत के चलते गेहूं व दलहनी फसलों पर संकट के बाद मडरा रहे हैं। नोटबंदी के बाद बैंकों से कैश नहीं मिलने से किसानों को खाद व बीज के लिए भी जूझना पड़ रहा है। किसानाें की समस्याएं पखवारे भर में दूर नहीं हुई तो उनकी फसलें बर्बाद हो जाएंगी।
लालगंज इलाके की प्रमुख नहर सगरा रजबहा है। इससे रामपुर बावली, रानीगंज कैथौला, सगरा सुंदरपुर, लालगंज, बाबूगंज, जलेशरगंज आदि बाजारों के सैकड़ों गांवों में किसानों के खेतों को पानी मिलता है। धान की फसल काटने के बाद किसान खेतों में सीजन की प्रमुख फसल गेहूं के साथ चना, मटर, अरहर, सरसो आदि दलहनी फसल बोने की तैयारी में लगे थे। लेकिन बीते माह भर से रजबहाें व माइनर में सूखा सा पड़ गया है। बताया गया कि नहरों की साफ सफाई कराने के बाद पानी छोड़ दिया जाएगा, लेकिन अभी तक न तो सफाई कराई गई और न ही अभी तक पानी छोड़ा जा सका।
पानी आने की आस देखते देखते निराश किसानाें ने यह सोचकर गेहूं व दलहनी बीजों की खेतों में रोपाई कर दी। इसके बाद से किसाना प्रतिदिन नहराें में पानी की राह देखते हैं लेकिन नहरें सूखी पड़ी हुई हैं। किसानों का कहना है कि बैंकों से पैसा नहीं मिलने से वह न तो पंपिंग सेट से पानी खरीद पा रहे हैं और न ही खाद व कीटणुनाशक दवाइयां फसलों में डाल सके।