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न जाने क्या गुल खिलाएगी वोटरों की यह खामोशी

Wed, 08 Feb 2017 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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न तस्वीर बदली न तासीर। हर शाम को दम तोड़तीं उम्मीदों और सुबह आशा की नई किरण की कश्मकश के बीच बुधवार दोपहर भी मात्र चार किमी के दायरे में फैला बूढ़ा शहर जवान हो रहा था। दोपहर बारह बजते-बजते हलचल तेज हो गई। व्यावसायिक गतिविधियों, सरकारी क्रियाकलापों और बीमारों के बीच कामगारों की भीड़ में निजी कामकाज को लेकर भी भागदौड़ जारी थी। अड़ीबाज जुट गए थे, सरकारी महकमों के मुलाजिम भी, लेकिन कहीं भी चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं। न पहले जैसा जोश, न उत्साह। नेताओं और प्रत्याशियों को लेकर होने वाली जूनूनी बहस और हार-जीत की तकरार भी गायब थी। हर तरफ काम की चिंता थी और चुनाव को लेकर अजीब खामोशी। इस पर चंद्र प्रकाश उपाध्याय की रिपोर्ट।
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दोपहर सवा बारह बजे जिला अस्पताल के सामने रोज की तरह सड़क तक फैली दुकानों के चलते लगे जाम में गाड़ियां फंसी थीं। वाहनों के शोर के साथ पटरी दुकानदार और ठेले खोमचे वाले अपने सामान बेचने के लिए आवाज  लगा रहे थे। फल बेच रहे मोहम्मद यूनुस से जब चर्चा छिड़ी तो बोले अभी चुनाव के बारे में सोचने और बात करने की फुर्सत किसे है। 23 फरवरी आएगी तो मतदान किया जाएगा।

शहर की जान चौक घंटाघर के पास बाइक रुकते ही सुबह से काम की तलाश में बैठे कामगारों की आंखों में चमक आ गई। उन्हें लगा कि बस अब बोहनी होने वाली है, लेकिन बात जब चुनाव को लेकर शुरू हुई तो उम्मीदें धूमिल हो गईं। काम ढूंढ रहे बिरजू, चंदन, रोहित ने कहा कि अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। चुनाव से एक-दो दिन पहले जब माहौल बनेगा तो इस बारे में सोचेंगे।
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दोपहर करीब एक बजे कचहरी के सामने ट्रेजरी चौराहे के बगल स्थित संजय चाय वाले की दुकान पर गहमागहमी थी। जोर-जोर से चर्चा चल रही थी। काली कोट में जुटे वकील बहस कर रहे थे, लेकिन मुद्दा चुनाव नहीं कलेक्ट्रेट में वकीलों के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध था। चाय बेचने संजय से जब बात छिड़ी तो कहा, चुनाव अभी दूर है। अभी तो वकीलों के प्रवेश का मुद्दा ही गरमाया हुआ है।

दोपहर करीब डेढ़ बजे स्टेशन के पास आठ-दस अड़ीबाज भी जुट गए थे। सचिन की दुकान पर चाय की चुस्कियों के बीच रात दस बजे के बाद शहर में पुलिस के दुकानें बंद कराने पर तर्क दिए जा रहे थे। बीच में एक ने चुनावी हार-जीत को लेकर चर्चा की तो बगल वाले ने टोकते हुए कहा, सारी आफत तो चुनाव के कारण ही आई है। इन नेताओं के चक्कर में सब परेशान हैं। दो बजे के करीब पड़ाव वार्ड की मलिन बस्ती में जमा कूड़े-कचरों के बीच बच्चे खेल रहे थे। हर कोई अपने काम के चक्कर में जल्दबाजी में था। बड़ी मुश्किल से मो. शमीम रुके। चुनाव पर बात हुई तो कहा अभी तो न नेता आए न हम सभी प्रत्याशियों को जानते हैं। समय आने पर फैसला होगा।

आगे बढने पर घोसियाना वार्ड में अली अहमद की पान की दुकान पर भीड़ जुटी थी। यहां गैस सिलेंडर न मिलने को लेकर लोग उलझे हुए थे। चुनाव के बारे में पूछते ही सब चौंक पड़े। पूछने लगे-किस पार्टी से हैं? जब प्रेस की जानकारी हुई तो मायूस होकर बोले, अभी तो नेता ही नहीं आ रहे तो चुनाव कैसा। टूटी-फूटी सडक़ों से थोड़ी देर बाद शहर से सटे परशुरामपुर गांव में पहुंचे तो सूरज शर्मा, अशोक कुमार के साथ चार-पांच लोग गेहूं की सिंचाई के लिए पाइप न मिलने को लेकर परेशान थे। कहा-23 फरवरी को वोट जरूर देंगे। अभी तो अपनी चिंता खाए जा रही है। इनके जैसे न जाने कितने वोटर और भी मिले जो चुनाव को लेकर सिर्फ इंतजार के मूड में हैं।
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