अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज ग्राम विकास व ग्राम पंचायत अधिकारियों ने शुक्रवार को कार्य बहिष्कार का एलान कर दिया। इसके साथ ही बीडीओ को छह सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर अधिकारियों, कंप्यूटर आपरेटर सहित अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। बीडीओ उन्हें मनाने का प्रयास करते रहे।
बिहार विकासखंड के मलावां छजयीपुर गांव में बुधवार को सीडीओ अश्वनी कुमार पांडेय सहित अन्य अधिकारी जांच के लिए आए थे। जांच के बाद वह ब्लाक कार्यालय पहुंचे और ग्राम पंचायत अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान एक ग्राम पंचायत अधिकारी छुट्टी पर था। इसकी जानकारी बीडीओ ने सीडीओ को नहीं दी। इस पर उन्होंने छुट्टी पर रहे ग्राम पंचायत अधिकारी पर कार्रवाई करने का निर्देश दे दिया। उनके निर्देश पर बीडीओ ने उसके पास मौजूद छह ग्राम सभाओं को हटाकर चार्ज दूसरे ग्राम पंचायत अधिकारी को दे दिया।
इसकी जानकारी पर ब्लाक के सभी ग्राम पंचायत अधिकारियों में रोष व्याप्त हो गया। बृहस्पतिवार को उन्होंने कार्य बहिष्कार का एलान कर दिया। इसकी जानकारी अधिकारियों को हुई तो उन्होंने बीडीओ के माध्यम से सभी को शुक्रवार को ब्लाक बुलाया। काफी बातचीत के बाद ग्राम पंचायत अधिकारियों ने छह सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इसमें ब्लाक की कार्यशैली को दोषपूर्ण बताया गया। कहा गया कि कार्य समय से अवगत नहीं कराया जाता। समय बीतने पर उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है।
मनरेगा सेल में कंप्यूटर आपरेटर को सीधे फाइलें दे दी जाती हैं। साथ ही बिना किसी कागजी औपचारिकता के आईडी जनरेट कर दी जाती है। जब आवास के लिए जाबकार्ड बनाने को कहा जाता है तो आर्थिक शोषण किया जाता है। मांग की गई कि कंप्यूटर आपरेटर के पास सीधे फाइलें नहीं जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास का मांगपत्र समय से नहीं जा पाया है तो सीधे सचिव ही दोषी न माने जाएं। प्रधानमंत्री आवास में गलत खाते फीड होने में सिर्फ सचिव ही दोषी माना जाते हैं। इसमें कार्यरत कंप्यूटर आपरेटर, आवास लिपिक, सेक्टर प्रभारी, तथा कार्यालय अधिकारी के पास वित्तीय अधिकार होने के कारण बीडीओ भी उत्तरदायी हों। साथ ही 29 अक्तूबर को की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई वापस ली जाए। इसको लेकर पूरे दिन बातचीत चलती रही। बीडीओ बिहार संतोष कुमार यादव ने सभी को मिलजुलकर काम करने आश्वासन दिया है।