केंद्र सरकार ने मैदान में चोटिल खिलाड़ियों को मौके पर ही मरहम पट्टी देने के आदेश जारी किए हैं।
पशु चिकित्सालय में आने वाली दवाओं का लाभ पशुपालकों को नहीं मिल रहा है। ज्यादातर चिकित्सक सरकारी दवाओं को बाजार में बेचकर मोटी कमाई कर रहे हैं। इस ओर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। इससे किसान परेशान हैं। पशुओं के बीमार होने पर उनके इलाज के लिए न्याय पंचायतों पर शासन की ओर से पशु अस्पताल खोले गए हैं। पशुओं से संबंधित दवाएं व टीका समय-समय पर शासन चिकित्सकों को मुहैया कराता है। मगर इन सरकारी अस्पतालों से पशुपालकों को किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा है। कारण यह है कि मवेशियों के बीमार पड़ने पर अस्पताल में चिकित्सक खोजे नहीं मिलते हैं।
गेट पर उनका नाम व मोबाइल नंबर लिखा होता है। फोन करने पर चिकित्सक सीधे पशुपालक के घर पहुंच जाते हैं। यहां बीमार मवेशी का इलाज करके दवा का पैसा वसूला कर मालामाल हो रहे हैं। साथ ही कुछ दवा और टीका को प्राइवेट चिकित्सकों के हाथ बेच देते हैं तो कुछ लोग घर ले जाकर सुबह शाम प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते हैं। इससे पशुपालक परेशान हैं। लोगों ने इसकी शिकायत कई बार जिला पशु चिकित्साधिकारी से की, मगर उन्होंने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इससे परेशान बाबा रामधन यादव, सुरेश, अनुराग, रामधन पटेल, ब्रम्हदेव मिश्र आदि लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पशु अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों की इस खेल की जांच कराकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी पशुओ के लिए आने वाले टीका और दवा का नि:शुल्क में वितरण कराने की मांग की। इस मामले में जिला पशुचिकित्साधिकारी से बात करने का प्रयास भी किया गया, मगर उनका मोबाइल नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बता रहा था।