लॉकडाउन में गरीबों को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए प्रारंभ की गई भरण-पोषण योजना ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए निरर्थक साबित हो रही है। ब्लाकों से लाभार्थियों से जो सूची आ रही है, उसमें सत्यापन रोड़ा बन गया है। आलम यह है कि ब्लाक को सत्यापन के लिए जो सूची भेजी गई, वह लौटकर विभाग नहीं पहुंची। इससे अभी तक एक-एक हजार रुपये खाते में नहीं पहुंचे हैं।
लॉकडाउन का अंतराल लंबा होने के कारण ग्रामीण इलाकों में गरीबी का दंश झेल रहे परिवारों को घर की गाड़ी खींचना भारी पड़ रहा है। मोदी और योगी सरकार ने गरीबों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए मुफ्त में अनाज देने के साथ ही प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये देने की घोषणा की है। भरण-पोषण के नाम से प्रारंभ इस योजना में उन लाभार्थियों का चयन करना था, जिन्हें विभाग की किसी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। शहरी और ग्रामीण इलाकों के लिए लागू इस योजना के लिए जिले के 17 विकास खंडों के बीडीओ से सूची मांगी गई।
डीएम के निर्देश पर बीडीओ ने ग्राम पंचायतों से पात्रों की सूची बनाकर भेज दी, मगर संख्या अधिक होने पर पुन: ब्लाकों को भेजकर सत्यापन करने को कहा गया। दरअसल, इस सूची में अधिकांश प्रवासी मजदूर भी हैं, जिन्हें लाभ देने के लिए प्रधानों ने उनका नाम शामिल करा दिया। इधर, अफसरों ने पहले चरण में 5,304 लाभार्थियों के खाते में धनराशि तो भेज दी, मगर जब संख्या बढ़ने लगी तो सत्यापन की याद आ गई। हालांकि, विकास विभाग आवेदकों की संख्या बताने से कतरा रहा है। मगर उनका दावा है कि पात्रों की सूची आते ही उनके खाते में धनराशि भेजी जाएगी।
भरण-पोषण योजना के लिए मिलने वाली सूची का सत्यापन कराया जा रहा है। जिन लोगों की सत्यापित सूची आई थी, उनके खाते में धनराशि भेज दी गई है।
सुदामा प्रसाद, डीडीओ