शांतिकुंज हरिद्वार उत्तरी जोन प्रभारी वीरेंद्र तिवारी ने कहा है कि हवन, पूजन से दैवीय विचारों का जन्म होता है। यह मन की शांति के लिए ही नहीं बल्कि वातावरण को शुद्ध करने के साथ ही गलत विचारों को दूर कर अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। रविवार को धूप खिलते ही शहर के जीआईसी में गायत्री परिवार के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सुबह हवन-पूजन और शाम को होने वाली प्रज्ञा पुराण कथा में भक्तों की भारी भीड़ संभालने में आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शांतिकुंज हरिद्वार से आए वीरेंद्र कुमार ने पाप और पुण्य के विषय में भक्तों को भावनाओं से जोड़ा। उन्होंने कहा कि पाप वह है जिसे करने के बाद आप गलत महसूस करते हैं। पुण्य वह है जिसे करने के बाद स्वयं को आत्म संतोष होता है। उन्होंने कहा कि मां गायत्री बुद्धि की देवी है।
मां गायत्री का सच्चा भोजन स्वअध्याय है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं है। इसलिए व्यक्ति को प्रतिदिन स्व अध्याय करना चाहिए। स्व अध्याय की व्याख्या करते हुए कहा कि सिर्फ किताब पढ़ना नहीं, बल्कि स्वयं का अध्ययन करना चाहिए। दिन भर का लोखा-जोखा यदि व्यक्ति दुरुस्त रखें, तो लोगों से कभी भी गलत काम न हो। रविवार के कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री परिवार के प्रज्ञा कुमार सिंह के सर्वतो भद्र मंडल के पूजन-अर्चन से प्रारंभ हुआ। हवन कुंड में आहुति डाल रहे भक्तों से सारे दुर्गुणों को समर्पित करने का संकल्प दिलाया। गायत्री शक्ति पीठ के मुख्य ट्रस्टी चंद्रिका प्रसाद सिंह, लक्ष्मी नारायण शर्मा, रोशनलाल उमरवैश्य, राम अकबाल सिंह, आरएन सिंह, उमेश त्रिपाठी, मनोकानिका उपाध्याय दिन भर व्यवस्था दुरुस्त करने में लगे रहे। प्रज्ञा पुराण कथा के समापन पर दीपोत्सव का आयोजन कर पं. श्रीराम शर्मा और उनकी धर्मपत्नी भगवती देवी शर्मा की भक्तों ने आरती की। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।