माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट 17 मई को घोषित कर आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड को पीछे छोड़ दिया है। अभी तक आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड से पीछे रहने वाले यूपी बोर्ड ने इस वर्ष शिक्षासत्र में सुधार करने के लिए यह पहल की है।
सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की तर्ज पर यूपी बोर्ड ने स्कूलों का समय ही नहीं बदला है, बल्कि शिक्षासत्र को भी बदल दिया है। बोर्ड का चालू शिक्षासत्र से शिक्षण व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में पहला कदम सफल रहा। बीते वर्षो में आईसीएसई और सीबीएसई बोर्ड का रिजल्ट आने के बाद यूपी बोर्ड के बच्चों को परिणाम आता था। मगर ऐसा पहली बार हुआ कि सभी बोर्डों को पीछे छोड़ते हुए यूपी बोर्ड ने सबसे पहले रिजल्ट घोषित कर दिया। पूर्व के वर्षो में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं मार्च में हुआ करती थीं, मगर पहली बार ऐसा हुआ कि 19 फरवरी से परीक्षाएं प्रारंभ हुईं और मार्च में समाप्त हो गईं।
शिक्षकों के आन्दोलन के बाद भी मूल्यांकन पर कोई असर नहीं पड़ा। यूपी बोर्ड का रिजल्ट पहले आने से बच्चों ने ही नहीं, बल्कि स्कूल संचालकों ने भी राहत की सांस ली है। बीस मई को शिक्षासत्र के दो माह बीतने वाला है। पहले रिजल्ट आने से बच्चों का फायदा यह होगा कि वह मई माह में ही कक्षा ग्यारह में दाखिला ले लेंगे और जुलाई माह में स्कूल खुलते ही पठन-पाठन प्रारंभ हो जाएगा। स्कूल संचालक भी शिक्षासत्र समापन के पहले अधिकांश बच्चों का दाखिला लेने में सफल हो जाएंगे। विभाग की यह पहल निश्चित तौर पर सार्थक साबित होगी।