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खाद और पानी की समस्या पर अफसर हुए निरुत्तर

Sat, 03 Nov 2018 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़ - फोटो : प्रतापगढ़
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 आलू और गेहूं की बुवाई के लिए साधन सहकारी समितियों से डीएपी नदारद होने से नाराज किसानों की आवाज किसान मेला में उस समय गूंज उठी, जब डीएम  और सीडीओ मौजूद थे। डीएम ने जिला कृषि अधिकारी को बुलाकर खाद की उपलब्धता की जानकारी ली तो पता चला कि गोदाम में खाद डंप है। फिर क्या था, डीएम ने एआर सहकारिता अमित पांडेय और पीसीएफ जिला प्रबंधक मोनिक सिंह अकेला को बुलाकर फटकार लगाते हुए खाद नहीं पहुंचने का कारण पूछा। दोनों अफसरों के जवाब नहीं देने पर शाम छह बजे कैंप कार्यालय पर तलब किया। इधर डीएम ने दो दिन के अंदर समितियों पर खाद पहुंचाने का दावा किया है।   
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शुक्रवार को कृषि भवन में किसान मेला और रबी गोष्ठी का आयोजन कर किसानों को कम लागत में अधिक अन्न उपजाने के टिप्स दिए गए। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल सुरक्षा और प्रमाणित बीजों को उपजाने का आह्वान किया। जिले भर से आए अधिकांश किसानों की सबसे बड़ी समस्या इन दिनों जिले में डीएपी खाद नहीं मिलने की थी। उन्होंने खुले बाजार में बिकने वाली खाद पुरानी बोरी पर नया दाम वसूलने का आरोप लगाया। साधन सहकारी समितियों पर खाद नहीं मिलने की बात कही। डीएम शंभु कुमार ने एआर और पीसीएफ जिला प्रबंधक के बीच समन्वय नहीं होने पर चेतावनी पत्र जारी किया है। डीएम ने किसानों से आह्वान किया कि वह नई प्रजाति के बीज उगाएं और बोने से पहले उसे शोधित करें। सीडीओ राजकमल यादव ने बिजली, खाद, पानी की समस्या को प्राथमिकता पर निपटाने का आश्वासन दिया। गांव से आए किसानों का आरोप था कि चिह्नित नहरों की सिल्ट सफाई प्रतिवर्ष होती है, जबकि कुछ नहरें ऐसी हैं, जिनकी सिल्ट की सफाई नहीं होती है।

इससे नहरें उफना कर बहती है। कुंडा से शिवकुमार ने बताया कि जब पानी की आवश्यकता होती है, तो नहरें सूखी रहती हैं, जब फसलों की कटाई का समय आता है, तो नहरें ओवरफ्लो होकर बहती हैं। डीएम ने अधिशासी अभियंता सुधीर पाल को बुलाकर फटकार लगाते हुए अब तक हुई सिल्ट सफाई का रिकार्ड तलब किया है। किसान मेले में मौजूद वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं का निराकरण किया। इसके पूर्व डीएम और सीडीओ ने विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। संगोष्ठी का संचालन कर रहे उपकृषि निदेशक डॉ. रघुनाथ सिंह ने किसानों के विभाग से संचालित अनेक योजनाओं की जानकारी दी। इस मौके पर संयुक्त कृषि आयुक्त आरबी सिंह, जिला कृषि अधिकारी डा. अश्विनी सिंह, नारोत्तम कुमार, अजय सिंह, प्रशांत सिंह, वीरेंद्र प्रताप सिंह, भानु प्रताप पांडेय आदि मौजूद रहे।  
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फसलों का अवशेष जलाने के बजाए खेतों में खाद के रूप में प्रयोग करने के लिए मल्चर मशीन चलाई गई। डीएम, सीडीओ और किसानों की मौजूदगी में अवशेष को नष्ट करने वाली मशीन से होने वाले फायदे भी बताए गए। डीडी ने बताया कि 1.80 लाख की यह मशीन 50 प्रतिशत अनुदान पर किसानों के उपलब्ध है।

हैप्पी सीडर, रोटावेटर, मल्चर, जीरोटिल, रोटरी स्लेश्र, पैडी स्ट्राचापर, श्रेडर, रिवर सेबिल एमबी प्लाऊ, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम पचास प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध है। कोई भी किसान छह नवंबर तक डीडी कार्यालय से संपर्क कर प्राप्त कर सकता है।
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