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जिला पंचायत सदस्यों के रुख को भांपना बना चुनौती

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जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में अब सिर्फ दस दिन शेष हैं। तीन दिन बाद से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सत्ताधारी भाजपा, सपा और जनसत्ता दल ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, लेकिन किसी के पास भी बोर्ड बनाने के लिए सदस्यों की संख्या पूरी नहीं हैं। ऐसे में जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए हर जतन किए जा रहे हैं, लेकिन सदस्य पत्ता खोलने के लिए तैयार नहीं हैं। वह शाम को कहीं तो सुबह कहीं और नजर आ रहे हैं। इससे सियासी दिग्गज भी चकराए हुए हैं।
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जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में इस बार कुंडा के विधायक और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने माधुरी पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने क्षमा सिंह को मैदान में उतारकर मुकाबला रोचक बना दिया है। अंतिम दौर में सपा ने भी पूर्व ब्लाक प्रमुख सभापति यादव की भयाहू अमरावती देवी को अपना प्रत्याशी घोषित कर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। 26 जून को नामांकन और तीन जुलाई को मतदान होना है। उसी दिन परिणाम भी आ जाएगा।
चुनाव नजदीक देख जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में लाने के लिए सभी दल मशक्कत कर रहे हैं। केवल राजाभैया की पार्टी जनसत्ता से जीते हुए सदस्य ही दूसरे खेमे में नहीं देखे जा रहे। जबकि भाजपा और सपा के समर्थन से कामयाब होने वाले अधिकांश सदस्यों के साथ निर्दल सदस्य सुबह किसी प्रत्याशी के खेमे में तो शाम को दूसरे खेमे में पहुंच जा रहे हैं।
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प्रत्याशियों की ओर से आयोजित भोज में बुलावे के बाद वह हाजिरी लगाते नजर आ चुके हैं। जिला पंचायत सदस्यों को समझ पाना मुश्किल हो रहा है। वह सभी दलों के संपर्क में हैं। जोड़तोड़ की सियासत चरम पर है। अब देखना यह है कि तीन जुलाई को सदस्यों की वोटिंग के बाद किसके सिर सेहरा बंधता है।
सबसे अधिक सपा के उम्मीदवार जीते
जिला पंचायत में सदस्यों की संख्या 57 है। इस बार पंचायत चुनाव में सबसे अधिक समाजवादी पार्टी के समर्थन से मैदान में उतरे प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई थी। सपा नेताओं का दावा है कि उनके 17 जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीते हैं। जनसत्ता दल के 12, भाजपा के 7 और बसपा के 2 सदस्यों को कामयाबी मिली है। 19 निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। यही सदस्य इस चुनाव में निर्णायक साबित होंगे। सभी दल निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने पाले में करने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।
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