मंगलवार को एक अपहृत किशोर की दादी ने सीओ कार्यालय में फांसी लगाने का प्रयास किया। देवसरा इलाके के गोपालपुर से अपहृत किशोर की सुपर्दगी को लेकर कोतवाली से सीओ कार्यालय तक हंगामा मचा रहा। इस दौरान एक सपा नेता के दबाव में पुलिस अधिकारियों ने किशोर को उसके मामा की सुपुर्दगी में यह कहकर सौंप दिया कि किशोर ने मां के साथ रहने की सहमति दी है। इस कार्रवाई से खफा किशोर की दादी ने पुलिस पर गंभीर आरोप मढ़े। इस दौरान वकीलों ने दादा-दादी के पक्ष में हंगामा किया।
बीते 31 मई को गोपालपुर देवसरा निवासी गोपीनाथ यादव ने थाने पर तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसके पोते अभिषेक (14) का असलहाधारियों ने अपहरण कर लिया है। इस मामले में उसने किशोर के मामा को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराने की मांग की थी। पुलिस प्रकरण में चुप्पी साध कर बैठी रही और यह कहती रही कि अपहृत किशोर को उसकी मां के पास उसका मामा ले गया है। मामला गरम होने पर पुलिस सक्रिय हुई। अपहृत किशोर के मामा को फोन पर पुलिस ने अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत होने का दबाव बनाया। अपहरण का मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी दी। प्रकरण में एक सपा नेता का दबाव होने के कारण पुलिस दादा-दादी की जगह किशोर की मां का पक्ष ले रही थी। अपहृत किशोर को लेकर उसका मामा उमानाथ यादव निवासी बरसठा जौनपुर अफसरों के सामने पेश हुआ।
पुलिस ने अपहरण की तहरीर देने वाले गोपालपुर निवासी गोपीनाथ और उनकी पत्नी मोहरावती को भी बुलवा लिया। बताते हैं कि सीओ पट्टी ने दादा-दादी को अपने कार्यालय में बैठा दिया। जबकि किशोर और उसके मामा को कोतवाली ले जा गया। वहां किशोर से यह लिखवा लिया गया कि वह मां के साथ रहेगा। इसके बाद उसे मामा के साथ भेज दिया गया। जब इसकी जानकारी उसकी दादी मोहरावती को हुई तो वह कोतवाली पहुंचकर हंगामा करने लगी। पुलिस वालों पर लालच में गलत निर्णय देने का आरोप जड़ा। वह वहीं अचेत हो गई। वहां से निकलते समय कोतवाली गेट पर वह दोबारा अचेत हो गई। वह सीओ कार्यालय पहुंची और वहां उसने फांसी लगाने का प्रयास किया। पुलिस वालों ने उसे किसी तरह मेज से नीचे उतारा। मामले की जानकारी होने पर बड़ी संख्या में वकील वहां पहुंच गए और किशोर के दादा-दादी का पक्ष लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। किसी तरह पुलिस ने मामले को शांत कराया। इस मामले में सीओ पट्टी सुकरम पाल सिंह तोमर का कहना है कि बच्चे की सुपुर्दगी पिता और मां को ही दी जाती है। वह भी इस पर निर्णय अदालत का होता है। जबकि दादा-दादी पोते को अपनी सुपुर्दगी में चाहते हैं। इसमें पुलिस क्या कर सकती है किशोर ने मां के साथ रहने की बात की तो उसे भेज दिया गया। उन्होंने एसओ देवसरा को तहरीर की जांच के आधार पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।